
तीन दिवसीय श्री हनुमंत कथा में कथा व्यास ने सुनाया राम नाम का प्रभाव
छतरपुर। सिद्ध क्षेत्र बागेश्वर धाम में श्री हनुमान जन्म महोत्सव के पावन अवसर पर तीन दिवसीय श्री हनुमंत कथा चल रही है। कथा के दूसरे दिन वृंदावन धाम से आए प्रख्यात कथावाचक पुण्डरीक गोस्वामी जी ने रामनाम की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि जो शव को शिव बना दे वही श्रीराम नाम मंत्र है। एक प्रसंग के माध्यम से उन्होंने रामनाम के प्रभाव का वर्णन किया।सिद्धधाम गढ़ा के कथा स्थल से श्री हनुमान जी के जीवन दर्शन का संचार हो रहा है। यहां उपस्थित हजारों धर्मप्रेमियों को हनुमान चालीसा के गूढ़ रहस्यों का ज्ञान हो रहा है। कथाव्यास पुण्डरीक महाराज ने कहा कि समस्या को तपस्या की तरह लेने वाला योगी कहलाता है। उन्होंने हनुमान चालीसा के प्रथम दोहा का सरस वर्णन करते हुए कहा कि जहां भगवान श्रीराम के चरित्र का गान होता है वहां हनुमान जी तुरंत पहुंच जाते हैं इसीलिए तुलसीदास जी ने वरनो रघुवर विमल जस गाया है। क्योंकि जहां रघुवीर के पुण्य यशों का वर्णन होगा उन्हें सुनने के लिए हनुमान जी आकर कल्याण करते हैं।
हनुमान चालीसा है स्वतंत्र गंं्रथ
कथाव्यास श्री गोस्वामी कहते हैं कि सुंदरकाण्ड रामचरित मानस का अंश है, श्रीमद् भागवत गीता महाभारत का अंश है लेकिन हनुमान चालीसा विश्व का सबसे छोटा स्वतंत्र ग्रंथ है। उन्होंने जनमानस को बताया कि हनुमान चालीसा में 108 बार हनुमान जी का नाम आया है और 10 बार श्रीराम जी का नाम। जब यश के ऊपर सेवा भाव होगा तभी हनुमान जी प्रसन्न होते हैं। भगवान श्रीराम धर्म की मूर्ति हैं और धर्म के 10 लक्षण बताए गए हैं इसलिए श्रीराम का हनुमान चालीसा में 10 बार नाम आया है







