नौगांव। नगर से होकर गुजरने वाले एनएच-39 पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा वाहन चालकों के लिए लगातार परेशानी और हादसों का कारण बन रहा है। शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे हाईवे पर आधा सैकड़ा से अधिक मवेशी सड़क के बीचों-बीच घूमते नजर आए। इससे तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक मवेशी आने का खतरा बना रहा और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हाईवे के आसपास कुछ मृत गायें भी सड़क किनारे पड़ी दिखाई दीं। मृत मवेशियों को कुत्ते और अन्य जानवर नोचते हुए नजर आए। हाईवे पर इस तरह के दृश्य सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार एजेंसियों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
फेंसिंग के बावजूद हाईवे पर पहुंच रहे मवेशी
हाईवे की सुरक्षा के लिए सड़क के दोनों ओर फेंसिंग और ओवरब्रिज के नीचे सुरक्षा व्यवस्था किए जाने का दावा किया जाता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मवेशियों का हाईवे तक पहुंचना व्यवस्था की खामियों को उजागर कर रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार मवेशियों के कारण आए दिन दुर्घटनाओं की स्थिति बनती है। कई बार वाहन चालक अचानक सामने आए मवेशियों को बचाने के प्रयास में संतुलन खो देते हैं।
बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में निर्देश दिए जा चुके हैं कि एनएच-39 पर आवारा मवेशी पाए जाने की स्थिति में संबंधित हाईवे एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने से इन निर्देशों के पालन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
टोल वसूली के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
हाईवे पर वाहन चालकों से टोल के रूप में शुल्क लिया जाता है। ऐसे में सड़क की सुरक्षा और आवारा मवेशियों को रोकने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि मवेशियों को हाईवे पर आने से रोकने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की है, तो फिर लगातार मवेशी सड़क पर कैसे पहुंच रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और हाईवे प्रबंधन से मांग की है कि एनएच-39 पर आवारा मवेशियों को रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था की जाए। साथ ही सड़क किनारे पड़े मृत मवेशियों को तत्काल हटाया जाए और हादसों की आशंका को देखते हुए जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यह है कि हाईवे पर सुरक्षा के दावों और जमीनी हकीकत में इतना अंतर क्यों है और यदि मवेशियों के कारण कोई बड़ा हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?









