
खजुराहो। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा संचालित आदिवर्त जनजातीय लोककला राज्य संग्रहालय, खजुराहो में बीती शाम आयोजित हुए देशज समारोह में बुंदेली लोक कला की जीवंत प्रस्तुति हुई, जिसमें बुंदेलखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर की एक अद्भुत झलक देखने को मिली। उल्लेखनीय है कि आदिवर्त जनजातीय लोककला राज्य संग्रहालय खजुराहो में यह अनोखा आयोजन हर शनिवार और रविवार को आयोजित किया जाता है, जिसमें नृत्य, नाट्य, गायन और वादन जैसी विधाओं का समावेश होता है। यह कार्यक्रम लोक कला को सहेजने और बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है, जिससे न केवल बुंदेलखंड की कला को प्रमोट किया जाता है, बल्कि इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सुनहरा अवसर मिलता है।समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन और कलाकारों के स्वागत से हुई। कलाकारों ने बुंदेली लोकगीतों और बधाई नृत्य की प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। विशेष आकर्षण थी बुंदेलखंड के प्रसिद्ध लोकगीतों की गायन और नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियां। कार्यक्रम में प्रमुख कलाकारों के रूप में रूपराम पटेल, नवल किशोर, सुश्री रामरती चौरसिया, सरोज कुमार रावत, सुश्री नीतू चौरसिया और हरप्रसाद रैकवार ने अपनी कला से समां बांध दिया। समारोह में सुश्री शशी कुशवाहा ने शानदार बधाई नृत्य पेश किया, जिसे दर्शकों ने काफी सराहा। इन प्रस्तुतियों में संगीत की संगत के लिए धीरज अहिरवार (ढोलक), रज्जू विश्वकर्मा (बेन्जो), अश्वनी कुशवाहा (हारमोनियम), घनश्याम प्रजापति (नगडिय़ा), पट्टू अहिरवार (झींका), नन्द किशोर कुशवाहा (मंजीरा) और रोहित मिश्रा (आर्गन पेड) ने भी अपनी प्रस्तुति से माहौल को और जीवंत बना दिया।







