Home डेली न्यूज़ जामुन का पेड़ नाटक में दिखाई सिस्टम की लेट लतीफी

जामुन का पेड़ नाटक में दिखाई सिस्टम की लेट लतीफी

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छतरपुर। बच्चों को रंगमंच के माध्यम से शिक्षा देने के उद्देश्य से उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज द्वारा शिक्षा में रंगमंच नाम से कार्यशालाओं का आयोजन विभिन्न स्कूलों में किया जा रहा था।उसी तारतम्य में छतरपुर में भी एल एस मेमोरियल स्कूल बगौता में भी एक माह की कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें बच्चों ने कृष्णचंदर की मशहूर कहानी जामुन का पेड़ पर आधारित नाटक का मंचन लक्ष्मण राजा हॉस्टल बगौता के परिसर में किया।यह कहानी उनके पाठ्यक्रम में शामिल थी और इस कार्यशाला से उन्होंने जाना कि कैसे हम कहानियों को अभिनय या नाटक के माध्यम से ज़्यादा अच्छे से समझ सकते हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।इस दौरान म. प्र. राज्य आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक श्याम गौतम, हॉस्टल के संचालक पवन राजावत, समाजसेवी अजय सिंह, विकास सिंह और नीरज खरे मौजूद रहे।नाटक का सह निर्देशन अभिदीप सुहाने और निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी शिवेन्द्र शुक्ला ने किया।
यह थी नाटक की कहानी
इस व्यंग्य नाटक में सरकारी लेट लतीफी पर करारा व्यंग्य किया गया है।जिसमें सचिवालय में लगा एक जामुन का पेड़ अचानक गिर जाता है जिसके नीचे एक गरीब मजदूर दब जाता है।सचिवालय का मालिक अफसर को सूचना देकर पेड़ कटवाकर आदमी को जि़न्दा बचाने की बात कहता है।यहां से सरकारी सिस्टम की भर्राशाही देखने को मिलती है।साहब कहते हैं कि पेड़ ऐसे नहीं कटवा सकते क्योंकि यह वन विभाग का मामला है।वहां से क्लियरेंस होने के बाद ही काम आगे बढ़ेगा।फिर वन विभाग को सूचना दी जाती है।फलदार पेड़ होने की वजह से फाइल उद्यानिकी विभाग पहुंचती है।तब तक पेड़ के नीचे दबा आदमी दर्द से कराहता रहता है और माली उसे खाना खिलाकर सांत्वना देता है कि फाइल आगे बढ़ रही है जल्द ही पेड़ कटवा दिया जाएगा।ऐसे ही एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर फाइल चलती जाती है और अंत में जब पेड़ कटवाने का डिसीजन आता है और माली खुशखबरी देने आदमी के पास जाता है तब तक तीन दिन से दबा आदमी प्राण त्याग देता है।इस कहानी में एक छोटे कर्मचारी माली की संवेदनशीलता और बड़े अफसरों की असंवेदनशीलता के साथ ही सरकारी दफ्तरों की भर्राशाही पर करता व्यंग्य है।अंत में दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध गज़़ल “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं” से नाटक का भावपूर्ण समापन होता है.।इस नाटक में स्कूल के 15 छात्रों ने भाग लिया जिसमें नव्या कुशवाहा, अद्वैत खरे,समर सिंह यादव, प्राग्नेंद्र कुशवाहा, शैंकी यादव, राज पाठक, लवेश अहिरवार, रविराज पटेल, राजवीर लोधी, घनेन्द्र अहिरवार, गौतम राजपूत, खुशाल दलवे, सूरज सैनी, विष्णु सैनी, नमन विश्वकर्मा आदि ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया।
अतिथि श्याम गौतम ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं न सिर्फ बच्चों में अभिनय प्रतिभा निखारतीं हैं बल्कि पाठ्यक्रम का इस तरह उपयोग भी हो सकता है उसको भी रेखांकित करतीं हैं। हॉस्टल के संचालक पवन राजावत ने उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के निदेशक सुदेश शर्मा, उप निदेशक डॉ मुकेश उपाध्याय, कार्यशाला संयोजक मनोज कुमार सहित निर्देशक शिवेन्द्र शुक्ला और शंखनाद टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों के लिए लक्ष्मण राजा हॉस्टल के द्वार हमेशा खुले रहेंगे।कार्यक्रम का संचालन नीरज खरे ने किया।इस अवसर पर विद्यालय और हॉस्टल स्टाफ सहित शंखनाद नाट्य मंच के सर्वेश खरे, श्रुति चौरसिया,निशांत वाल्मीक, दीपचंद्र प्रजापति, मानस गुप्ता, स्वाति विश्वकर्मा, अभि तिवारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। नाटक के समापन पर सभी प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

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