छतरपुर, जिला प्रशासन के आग्रह पर आनंद विभाग द्वारा छतरपुर जिले के सरकारी कर्मचारियों का छठवां आवासीय शिविर सोमवार को नौगांव में संपन्न हुआ। जिला संपर्क व्यक्ति लखनलाल असाटी ने उन्हें अपने व्यवहार के पीछे काम करने वाले विचार, भाव, संस्कार और मान्यताओं की ओर ध्यान दिलाया। संसार में परस्पर पूरकता के साथ निर्वाह देख पाते हैं तब स्वार्थी भाव से मुक्ति मिल जाती है।
प्रतिभागियों ने लगातार ढाई घंटे मौन रहने के बाद अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि 3 दिन की इस ट्रेनिंग में उनके जीवन का उद्देश्य ही बदल गया है, कटरा ग्राम पंचायत के ग्राम रोजगार सहायक संतराम राजपूत में कहा कि प्रशिक्षण में ही बुराइयों को त्याग कर घर जा रहा हूं। पहरा गौरिहार पंचायत के ग्राम रोजगार सहायक वीरेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि अब जीवन का उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं रहेगा, शांति के साथ रहकर प्रकृति से भी संवाद करूंगा अच्छे कर्मों से ही परिवार का पालन करूंगा, मौन को नियमित दिनचर्या में शामिल करूंगा। नगर परिषद घुवारा से सोनू सिंह तोमर ने कहा कि 3 दिन में जीवन का उद्देश्य बदल गया है अब तो खुद से खुद को मिलने का कार्यक्रम बनाया है। लवकुश नगर से ग्राम रोजगार सहायक रामबाबू सिंह ने कहा कि आज ईमानदारी और जिम्मेदारी का संकल्प लेकर घर जा रहा हूं। सांदनी राजनगर के ग्राम रोजगार सहायक विजय बिहारी दुबे ने कहा कि निस्वार्थ कार्य करने से ईश्वर मेरी सभी ज़रूरतें पूरी कर रहा है। नगर परिषद लवकुशनगर से जितेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि बुराइयों का त्याग कर रहा हूं, जीवन का लक्ष्य अब दूसरों की मदद करना है परिवार को साथ लेकर चलना है। पटवारी उमेश कुमार पटेल ने कहा कि कभी-कभी स्वार्थ भाव नौकरी में आने लगता है जिसे यहां देख पाया हूं, अब निस्वार्थ बनने का प्रयास करूंगा। बक्सवाहा से जनशिक्षक शैलेंद्र कुमार चौरसिया ने स्वीकार किया कि कभी-कभी समय की चोरी करता हूं, पर अब जीवन का उद्देश्य कर्तव्य निष्ठा होगी। लवकुश नगर से ग्राम पंचायत सचिव शिवराम पाल ने कहा कि अब कुछ भी गलत नहीं करूंगा महेबा जनशिक्षक मनमोहन अहिरवार ने कहा कि मौन को कंटिन्यू करना चाहता हूं। बड़ा मलहरा से जनशिक्षक देवेंद्र कुमार तोमर ने स्वीकार किया कि कई बार झूठ बोलते हैं अब इस पर काम करेंगे। महिला बाल विकास विभाग से पर्यवेक्षक सीमा ठाकुर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जीनत सिद्दीकी, पुष्पा अहिरवार, अर्चना रैकवार, अनीता द्विवेदी, संध्या त्रिपाठी, प्रभा चौबे, अर्पण अग्निहोत्री, रेखा सिंह परिहार ने भी अपने अनुभव साझा किये।
प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि बहुत सारी बुराइयां और अच्छाइयां उनके अंदर हैं अब वह अच्छाइयों को अधिक बढ़ाएंगे बुराइयों को काम करेंगे।
क्रोध आना सब की समस्या
लगभग सभी प्रतिभागियों की यह स्वीकारोक्ति थी कि उन्हें क्रोध बहुत आता है, जल्दी आता है, खुद पर नियंत्रण खत्म हो जाता है, मास्टर ट्रेनर लखन लाल असाटी ने कहा कि क्रोध आता नहीं बल्कि हम सोच समझ कर करते हैं तभी तो यह ताकतवर के सामने नहीं अपितु कमजोर व्यक्ति पर ही आता है। अंदर भाव संबंध का होता है तब हम क्रोध को टाल देते हैं अंदर भाव विरोध का होता है तो फट पड़ते हैं। इसीलिए व्यवहार के पहले अपने अंदर चल रहे विचार और उस विचार के पीछे के भाव को देखने की जरूरत है, जब भी क्रोध आए तब खुद से प्रश्न करें कि क्रोध करते समय में अंदर से सहज हूं अथवा असहज। क्या यह असहजता मुझे स्वीकार है क्या मैं इसके साथ लगातार बने रहना चाहता हूं हमेशा उत्तर आएगा नहीं, उसको अंदर देख पाने के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत है।









