
छतरपुर। जिले में बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी के बीच बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। जिला अस्पताल की चिकित्सक डॉ. कविता तिवारी ने बच्चों को गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में बच्चों में पानी की कमी, दस्त, बुखार और फ्लू जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जो उनकी सेहत के लिए गंभीर हो सकता है।
डॉ. तिवारी ने सलाह दी कि बच्चों को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक, जब धूप और गर्मी अपने चरम पर होती है, घर के अंदर रखना चाहिए। यदि बच्चे बाहर खेलने जाते हैं, तो माता-पिता को यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें हर 20-30 मिनट में पानी या अन्य तरल पदार्थ पिलाया जाए। गर्मी के कारण बच्चों के शरीर में पानी की कमी जल्दी हो सकती है, जिससे कमजोरी और अन्य समस्याएं हो सकती हैं। खान-पान के बारे में डॉ. तिवारी ने जोर दिया कि बच्चों को ताजा, घर का बना और साफ-सुथरा भोजन ही देना चाहिए। बाहर का जंक फूड, जैसे बर्गर, पिज्जा, और आइसक्रीम, इस मौसम में नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि यह पेट से संबंधित समस्याओं को बढ़ा सकता है। उन्होंने बताया कि यदि बच्चे को दस्त की शिकायत हो, तो तुरंत ओआरएस का घोल देना शुरू करें और चिकित्सक से संपर्क करें।
डॉ. तिवारी ने कहा कि मौसमी बदलाव के कारण फ्लू का खतरा भी बढ़ता है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में फ्लू सीजन कहा जाता है। इस दौरान बच्चों में सर्दी, खांसी और बुखार जैसी बीमारियां आम हो जाती हैं। इसे रोकने के लिए बच्चों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर ले जाने से बचें और उनके हाथों को बार-बार साबुन से धुलवाएं। डॉ. तिवारी ने पानी के लिए मिट्टी के घड़े के उपयोग की सलाह दी, क्योंकि यह पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा और स्वच्छ रखता है। उन्होंने फ्रिज के अत्यधिक ठंडे पानी से परहेज करने को कहा, क्योंकि यह गले और पेट की समस्याएं पैदा कर सकता है। डॉ. तिवारी ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के स्वास्थ्य पर नजर रखें और छोटी-सी लापरवाही को भी गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि सही खान-पान, नियमित जलयोजन और स्वच्छता के उपाय अपनाकर बच्चों को गर्मी की बीमारियों से आसानी से बचाया जा सकता है। यह सलाह न केवल बच्चों, बल्कि सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए उपयोगी है, ताकि गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य बना रहे।








