Home छतरपुर हम सुविधा विहीन दुखी दरिद्र हैं या सुविधा संपन्न दुखी दरिद्र: लखन...

हम सुविधा विहीन दुखी दरिद्र हैं या सुविधा संपन्न दुखी दरिद्र: लखन लाल असाटी

Jeevan Ayurveda

छतरपुर। राज्य आनंद संस्थान द्वारा नौगांव रोड स्थित पंचवटी योग आश्रम में रविवार को एक दिवसीय अल्पविराम कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों से संवाद करते हुए आनंद विभाग के जिला संपर्क व्यक्ति लखनलाल असाटी ने प्रश्न किया कि अभी हमारी स्थिति क्या है हम सुविधा विहीन दुखी दरिद्र है अथवा सुविधा संपन्न दुखी दरिद्र, आनंद विभाग की ओर से मास्टर ट्रेनर श्रीमती आशा असाटी रामकृपाल यादव के साथ 50 से अधिक प्रतिभागियों ने अल्पविराम कार्यक्रम में सहभागिता की। इस दौरान कुछ प्रेरणादायक खेल और फिजिकल एक्टिविटी भी संपन्न की गई। आनंद की ओर सत्र के दौरान श्रीमती आशा असाटी ने प्रतिभागियों से जानना चाहा कि आनंद क्या है और यह कैसे घटता बढ़ता है। इस पर प्रतिभागियों ने अपने निजी अनुभव साझा किया जिनका निष्कर्ष यह था कि आनंद का स्रोत मानव मानव के परस्पर व्यवहार से जुड़ा हुआ है परंतु जीने का अभ्यास कुछ इस तरह से हो गया है कि संबंधों के निर्वाह को समय न देकर सुविधा जुटाने को अधिक समय दे रहे हैं, लखन लाल असाटी ने मैं और शरीर की रियलिटी को अनुभव करते हुए कहा कि शरीर की आवश्यकता सीमित और मात्रात्मक है जिनमें कुछ भौतिक रासायनिक वस्तुओं की आवश्यकता होती है, परंतु मैं की आवश्यकता सतत और गुणात्मक है और इसमें केवल भावों की जरूरत है जैसे सम्मान प्रेम विश्वास, आवश्यकता की ठीक-ठाक पहचान ना हो पाने के कारण हमारा जीना कुछ इस तरह हो गया है कि हम सुविधा संपन्न होने के बावजूद दुखी दरिद्र बने रहते हैं परिणामत: लगातार सुविधाएं जुटाने के लिए प्रयास कर रहे हैं और इस प्रयास में खुद  परिवार, समाज और प्रकृति का भी शोषण करने में लगे हैं, एक बार आवश्यकता की पहचान ठीक-ठाक हो जाती है तब हम अपनी आवश्यकता पूरी कर समृद्धि के भाव में आते हैं तब फिर आगे का प्रयास परस्पर पूरकता के साथ संबंधों का निर्वाह करते हुए उभय सुख के लिए होता है।
अल्पविराम के दौरान प्रतिभागियों ने जानने का प्रयास किया कि उनकी कल्पनाशीलता क्या है और उसको चलाने का स्रोत क्या है अपनी खुद की कल्पनाशीलता को ठीक से चला कर वह कैसे ठीक निर्णय ले पाते हैं मान्यताओं धारणाओं और संवेदनाओं से परे खुद में पहले से ही विद्यमान सहज स्वीकृति को देखने का अभ्यास करना बहुत महत्वपूर्ण है और यह हमारे जीवन में निर्णय लेने की प्रक्रिया को निरापद बनता है जिससे आनंद का सृजन होता है।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here