Home छतरपुर सही-सही आकलन बच्चे की समझ बढ़ाने में सहायक: लखनलाल असाटी

सही-सही आकलन बच्चे की समझ बढ़ाने में सहायक: लखनलाल असाटी

Jeevan Ayurveda

ओवर,अंडर ओर अदरवाइज वैल्यूएशन लक्ष्य से भटकाएगा

छतरपुर। बच्चों की योग्यता का सही-सही आकलन उसकी समझ बढ़ाने में सहयोगी बनता है जबकि अधिमूल्यांकन, अवमूल्यांकन और अन्यथा मूल्यांकन उसे उसके लक्ष्य से भटका देता है। अभिभावक और शिक्षकों के लिए जरूरी है कि वही वह बच्चों का सदैव सही-सही आकलन कर उनकी योग्यता बढ़ाने में सहायक बने। आनंद विभाग के मास्टर ट्रेनर लखनलाल असाटी ने शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सुकवां में शिक्षकों, छात्रों, अभिभावकों, स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और शासकीय कर्मचारियों के संयुक्त अल्पविराम सत्र में यह बात कही।राज्य आनंद संस्थान द्वारा घोषित आनंद ग्राम रामगढ़ के पंचायत सचिव शिवनारायण पटेल द्वारा सुकवां में अल्पविराम एवं आनंद सभा का आयोजन किया गया था। सरपंच शकुंतला अहिरवार, बलदेव अहिरवार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता निकुंज लता अहिरवार, तारा वर्मा, ज्ञान देवी अहिरवार, सुमन पाठक, ग्रामीण अखिलेश नामदेव, कूरा बरार चौकीदार, ठाकुरदास कुशवाहा, हेमंत पटेल प्राचार्य संदीप तिवारी, शिक्षक खूबचंद पटेल, सतीश देव चौरसिया, रमेश चंद शिवहरे, वीरेंद्र चौरसिया, स्वतंत्र खरे,विकास गुप्ता, दुर्जन सूर्यवंशी, प्रमोद श्रीवास, भगवान दास अहिरवार, निदिशा चतुर्वेदी विद्यार्थी नैंसी नामदेव, राहुल अहिरवार, भागचंद कुशवाहा, राम अवतार पटेल, संतोष कुशवाहा, अजय अहिरवार, देवेंद्र कुशवाहा, मनोज अहिरवार, विकास नामदेव, शिवानी पटेल, सपना कुशवाहा, अर्चना अहिरवार, पुष्पेंद्र रैकवार, रसोईया रानी सेन, रामकली विश्वकर्मा, भगवती कुशवाहा, सरजू बाई कुशवाहा ,नन्ही बाई कुशवाहा, गुड्डी कुशवाहा, कमलेश कुशवाहा सहित अनेक ग्रामीणों ने सहभागिता कर अपने विचार साझा किए।सुविधा जुटाने के चक्कर में संबंधों की परवाह नहींलखन लाल असाटी ने अल्पविराम को स्पष्ट करते हुए कहा कि अभी हमें अपने से अधिक दूसरों की जानकारी रहती है खुद से संवाद करना खुद को जानना जीने में अधिक कारगर और सहायक है अल्पविराम इसमें मदद करता है। उन्होंने सभी से अपने जीवन का लक्ष्य बताने को कहा लक्ष्य बताते समय यह समझ बनी कि अभी हम रास्ते को मंजिल समझ रहे हैं अंतिम लक्ष्य तो सुख पाना है पर सुख का आधार सुविधा मानकर अधिक से अधिक सुविधा जुटाने के चक्कर में मानवीय संबंधों पर ध्यान नहीं जा रहा है जबकि सुविधा से अधिक संबंध का निर्वहन सुख बढ़ाने में सहायक होता है, जो जैसा है उसका वैसा आकलन करना सम्मान कहलाता है परंतु हम सही-सही आकलन करने की जगह ओवर, अंडर और दरवाइज वैल्यूएशन करते हैं जिससे सही-सही भाव नहीं बन पाते हैं। उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि कई बार छोटी सी सफलता पर मां-बाप अपने बच्चों को कहते हैं वह कुछ भी कर सकता है थोड़ा भी असफल हो जाने पर कहने लगते हैं जीवन में यह कुछ भी नहीं कर सकता पर इससे अधिक हद तो तब होती है जब वह कह देते हैं यह तो गधा है गधा। असाटी ने कहा कि मानव का मानव के प्रति व्यवहार सबसे अधिक महत्वपूर्ण है इस पर ध्यान दिए जाने से शिक्षा की पूर्णता हो जाती है। इस अवसर पर कुछ रोचक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को उनकी क्षमता की ओर ध्यान दिलाया गया तथा एकाग्रता बढ़ाने के उपाय बताए गए।

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