Home डेली न्यूज़ श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया ब्रह्मरूपी महाराज का अवतरण...

श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया ब्रह्मरूपी महाराज का अवतरण दिवस

Jeevan Ayurveda


खजुराहो। श्री मतँगेश्वर सेवा समिति खजुराहो, दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर के प्रमुख एवं आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य पंडित सुधीर शर्मा के संयोजन में आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के  शिष्य बाल ब्रह्मचारी गुरुदेव श्री ब्रह्मरूपी जी महाराज का पावन अवतरण दिवस फ्रांस एवं इटली में श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। समारोह में भारतीय संस्कृति, जैन दर्शन, अहिंसा और विश्व बंधुत्व का संदेश आत्मीयता के साथ दिया गया।
कार्यक्रम में गुरुदेव श्री ब्रह्मरूपी जी महाराज के तप, त्याग, संयम एवं आध्यात्मिक साधना पर प्रकाश डालते हुए उनके द्वारा मानवता के कल्याण तथा भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति के वैश्विक प्रसार में दिए जा रहे योगदान की सराहना की गई। श्रद्धालुओं ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं विश्व शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना की। फ्रांस में आयोजित समारोह में प्रसाद वितरण की व्यवस्था इंजीनियर सुरेंद्र गुप्ता द्वारा की गई। कार्यक्रम में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मंडल, आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के अर्हम ध्यान योग परिवार, हरे राम हरे कृष्ण (इस्कॉन) के भक्तगण, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि, ओशो भगवान रजनीश के अनुयायी तथा बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय एवं स्थानीय फ्रांसीसी एवं इतालवी नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
इस अवसर पर पंडित शर्मा ने कहा, गुरुदेव श्री ब्रह्मरूपी जी महाराज का जीवन तप, त्याग, करुणा, आत्मजागरण और शाकाहार का दिव्य संदेश है। उन्होंने अपने गुरुओं आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज की महान आध्यात्मिक परंपरा को विश्वभर में नई ऊर्जा प्रदान की है। आज जब विश्व हिंसा, अशांति और पर्यावरणीय संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब शाकाहार, अहिंसा और जीव दया ही मानवता के उज्ज्वल भविष्य का आधार बन सकते हैं। शाकाहार केवल भोजन की पद्धति नहीं, बल्कि करुणा, संवेदना और समस्त जीवों के प्रति सम्मान का जीवन-दर्शन है। यदि विश्व इस मार्ग को अपनाए, तो शांति, स्वास्थ्य और सद्भाव का नया युग स्थापित हो सकता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से शाकाहार अपनाने तथा प्रत्येक जीव के प्रति करुणा का भाव रखने का आह्वान किया। उनके प्रेरणादायी उद्बोधन से प्रभावित होकर अनेक विदेशी नागरिकों ने शाकाहार अपनाने की शपथ ली और भारतीय संस्कृति, अहिंसा तथा जीव-दया के सिद्धांतों के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने गुरुदेव श्री ब्रह्मरूपी जी महाराज के बताए मार्ग पर चलने, विश्व में शांति, प्रेम, अहिंसा, शाकाहार और मानवीय मूल्यों के प्रसार का संकल्प लिया। यह आयोजन फ्रांस एवं इटली में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक समरसता और वैश्विक सद्भाव का प्रेरणादायी उत्सव बनकर उभरा।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here