छतरपुर। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में शराब दुकानों के बाहर अवैध रूप से संचालित ठेले, ठिलिया और गुमटियां एक बार फिर लोगों की परेशानी का कारण बनती जा रही हैं। बस स्टैंड, चौबे तिराहा, पन्ना नाका और सटई रोड स्थित शराब दुकानों के बाहर शाम ढलते ही शराब पीने वालों की भीड़ जुटने लगती है। इससे आसपास रहने वाले लोगों, छात्रों और राहगीरों को असुविधा के साथ असुरक्षा का भी सामना करना पड़ रहा है।
नियमों के अनुसार शराब दुकानों की स्कूल, कॉलेज और धार्मिक स्थलों से निर्धारित दूरी होना अनिवार्य है। साथ ही राष्ट्रीय एवं राज्य मार्गों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट तथा आबकारी विभाग के दिशा-निर्देश भी लागू हैं। इसके बावजूद कई शराब दुकानों के बाहर खुलेआम शराब सेवन की स्थिति देखने को मिल रही है। सरकार द्वारा अधिकृत अहातों पर रोक लगाए जाने के बाद भी कई स्थानों पर ठेले-ठिलिया के माध्यम से अवैध अहातों जैसी व्यवस्था संचालित हो रही है।
पुलिस समय-समय पर अभियान चलाकर शराब दुकानों के बाहर लोगों को बैठाकर शराब पिलाने वाले ठेले संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करती है और उन्हें हिदायत भी दी जाती है। हालांकि यह कार्रवाई कुछ दिनों तक ही प्रभावी रहती है, जिसके बाद अवैध गतिविधियां फिर शुरू हो जाती हैं। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर लगातार कार्रवाई की जाती है और स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है।
कलेक्टर के निर्देशों के बाद देशी और विदेशी कंपोजिट शराब दुकानों के नए ठेकेदारों को भी स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि दुकानों के बाहर किसी भी प्रकार से लोगों को बैठाकर शराब न पिलाई जाए। छात्रों और आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आबकारी अधिनियम के तहत विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई किए जाने की बात भी प्रशासन की ओर से कही गई है।
ग्राउंड जीरो पर की गई पड़ताल में सामने आया कि शहर के कई शराब ठेकों के आसपास अवैध रूप से संचालित ठेलों पर लोग शराब पीने के लिए आवश्यक सामग्री खरीदकर खुलेआम शराब का सेवन कर रहे हैं। चौबे तिराहा, पन्ना नाका और पन्ना रोड जैसे व्यस्त इलाकों में शाम के समय यह स्थिति अधिक गंभीर दिखाई देती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित और प्रभावी कार्रवाई के अभाव में अवैध अहातों का संचालन लगातार जारी है, जिससे कानून-व्यवस्था के साथ सामाजिक वातावरण भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में नागरिकों ने प्रशासन से इन अवैध गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाने और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है।









