
पिछले दो दिनों से जिले भर में हो रही बारिश के कारण कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात निर्मित हो गए हैं। जिले के लगभग तीन दर्जन ग्रामीण अंचलों में फसलों के नष्ट होने की जानकारी कलेक्टर को मिली है, जिसके बाद कलेक्टर पार्थ जैसवाल द्वारा बाढ़ प्रभावित गांवों में हुए फसलों के नुकसान का सर्वे करवाया जा रहा है। घुवारा तहसील क्षेत्र के ग्राम दलीपुर निवासी किसान लोकमन यादव ने बताया कि उनके खेतों के पास से निकली बीला नदी के उफान पर आने के कारण पानी खेतों में भर गया है और उनकी सोयाबीन, उड़द, तिल की फसलें नष्ट हो गई हैं। इसी तरह जिले की केन, धसान, उर्मिल सहित अन्य नदी-नालों के किनारे बसे तीन दर्जन से अधिक गांवों के किसानों की फसलें खराब हुई हैं। कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने बताया कि पिछले दो दिनों में छतरपुर जिले में लगभग 13 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है। सबसे अधिक बारिश बड़ामलहरा, घुवारा और ईशानगर क्षेत्र में हुई है। जिले के कुल 38 गांवों से किसानों की फसलें बारशि के कारण खराब हुई हैं। कलेक्टर ने बताया कि राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम को निरीक्षण कर नुकसान का आंकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे के बाद शासकीय प्रावधान के मुताबिक किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।फसलों को अधिक बारिश से होने वाले नुकसान से बचाने के उपाएजिले में अगले पांच दिनों तक बारिश की संभावना है, इसके दृष्टिगत जिला प्रशासन द्वारा सभी किसानों को सलाह दी गई है कि अभी किसी प्रकार का छिड़काव ना करें तथा खड़ी फसलों व सब्जी नर्सरियों में उचित प्रबंधन रखें। दलहनी फसलों तथा सब्जी नर्सरियों में जल निकास की उचित व्यवस्था करें। खेतों में जलभराव होने से फसलों के पीली पडऩे एवं जड़ सडऩ रोग लगने की आशंका रहती है। नुकसान से फसलों को बचाने के लिए किसान अपने खेत के पानी का जल निकास करें, ताकि फसलों को जलभराव से कोई नुकसान नहीं हो। लगातार बारिश होने पर तिल में फाइटोफ्थोरा ब्लाइट लगने की संभावना बढ़ जाती है। अत: बीमारी लगने पर रेडोमिल 2 ग्राम या कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। वर्तमान में बारिश कि आशंका को देखते हुए मूंगफली में जड़ सडन एवं तना सडऩ का प्रकोप होने की संभावना है, बीमारी के लक्षण दिखने पर किसान भाई कार्बेंडाज़िम 12 प्रतिशत और मैनकोज़ेब 63 प्रतिशत डब्ल्यूपी दवा को मिलाकर छिडकाव करें। दीमक के नियंत्रण के लिए क्लोरोपाइरीफोस 3 मिली लीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिडकाव करें। लगातार बारिश से खरीफ की फसलों को नुकसान की आशंका को देखते हुए वर्तमान में सोयाबीन फसल में कुछ क्षेत्रों में एन्थ्रेकनोज रोग की संभावना बन रही है। शुरुआती लक्षण देखे जाने पर इसके नियंत्रण के लिए टेबुकोनाजोल 29.9 ईसी (625 एमएल व एचएसी) घोल बनाकर छिड़काव करें। खेतों में जलभराव होने से फसलों के पीली पडऩे एवं जड़ सडऩ रोग लगने की आशंका रहती है। नुकसान से फसलों को बचाने के लिए किसान अपने खेत के पानी का जल निकास करें, ताकि फसलों को जलभराव से कोई नुकसान नहीं हो।फसल नुकसान की भरपाई के लिए बीमित किसानों के लिए टोल फ्री नं.14447 जारीछतरपुर। जिले में हो रही लगातार वर्षा एवं अतिवृष्टि से फसल नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को फसल बीमा की सहायता देने के उपसंचालक कृषि डॉ. के.के. वैद्य ने जानकारी देते हुए बताया कि जिन किसानों की फसले वर्षा एवं अतिवृष्टि से खराब हुई है उनकी सूचना टोल फ्री नम्बर 14447 पर 72 घंटे के अंदर देना आवश्यक है और किसान भाई एप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कर या सहदावा पत्र भेजने के लिए एप में दिये गये पत्रक को भरकर फसल नुकसान की शिकायत बीमा कम्पनी को भेज सकते है। आवेदक के साथ बी-1 की कॉपी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति जिसमें प्रीमियम कटा हो, फॉर्म की कॉपी एवं संबंधित कागज जहाँ बीमा कराया हो उस बैंक में, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय, उपसंचालक कृषि कार्यालय या जिला स्तर पर बीमा कम्पनी को भी जमा कर सकते है।









