
गुरु का एक वाक्य हमें सर्व सुख प्राप्त करा सकता है – कौशिक जी
छतरपुर। इस लोक में मानव जीवन प्राप्त करने के बाद श्रीमद् भागवत कथा श्रवण बड़ा दुर्लभ है क्योंकि हमारे हजारों पुण्यों के बाद ही हमें भागवत कथा सुनने का मौका मिलता है। जो हमें चिंतामणि नहीं दे सकती, कल्पवृक्ष नहीं दे सकता वो हमें गुरु की कृपा दे सकती है। क्योंकि गुरु का एक वाक्य हमें सर्व सुख प्राप्त करा सकता है लेकिन वो मांगने से नहीं मिलता। यह बात कथावाचक श्री भगवती प्रसाद जी कौशिक ने कही।चेतगिर कॉलोनी हनुमान मंदिर में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के पहले दिन गुरुवार को 3 बजे कथा स्थल से कलश शोभा यात्रा बैण्ड-बाजों के साथ जवाहर मार्ग, चेतगिर एवं सीताराम कॉलोनी के मुख्य मार्गों से गुजरी। विशाल शोभा यात्रा में कथा प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शोभा यात्रा पश्चात श्रीमद् भागवत कथा प्रारम्भ हुई।श्री धाम वृन्दावन निवासी कौशिक जी कहते हैं कि इस श्रीमद् शब्द के पीछे एक बड़ा मर्म छुपा हुआ है श्री यानी जब धन का अहंकार हो जाए तो भागवत सुन लो, अहंकार दूर हो जाएगा। व्यक्ति इस संसार से केवल अपना कर्म लेकर जाता है। इसलिए अच्छे कर्म करो। भाग्य, भक्ति, वैराग्य और मुक्ति पाने के लिए भगवत की कथा सुनो। केवल सुनो ही नहीं बल्कि भागवत की मानों भी। सच्चा सनातनी वही है जो कृष्ण की सुने और उसको मानें, गीता की सुने और उसकी मानें भी। माता-पिता और गुरु की सुनो तो उनकी मानो भी तभी आपके कर्म श्रेष्ठ होंगे और जब कर्म श्रेष्ठ होंगे तो आप को संसार की कोई भी वस्तु कभी दुखी नहीं कर पायेगी। महाराज श्री कहते हैं कि जब आप पर संसार की किसी बात का प्रभाव पडऩा बंद हो जायेगा तो निश्चित ही आप वैराग्य की ओर अग्रसर हो जायेगे और तब ईश्वर को पाना सरल हो जायेगा।गौरतलब है कि यह संगीतमयी भागवत कथा प्रतिदिन दोपहर दो बजे से प्रारंभ होकर शाम सात बजे तक चलती है। सभी कथा प्रेमियों से आग्रह है कि अधिक से अधिक संख्या में पधार कर अमृतमयी कथा का श्रवण कर अपने आपको धन्य बनाएं।









