
छतरपुर। समेकित क्षेत्रीय कौशल विकास पुनर्वास एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण केंद्र सीआरसी छतरपुर में लुई ब्रेल के जन्मदिन के उपलक्ष्य में एक जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें छतरपुर जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र तथा प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र (आरआरसी) एवं सीआरसी के समस्त अधिकारी कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में दिव्यांगजन उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान दृष्टिबाधिता के क्षेत्र में ब्रेल लिपि का महत्व तथा उसके इतिहास पर चर्चा की गई। साथ ही वर्तमान समय में अल्प दृष्टि तथा दृष्टिहीन व्यक्तियों के शैक्षिक समावेशन तथा सशक्तिकरण में तकनीकी एवं प्रौद्योगिकी के विकास पर भी विस्तृत चर्चा की गई।लुई ब्रेल का जन्म फ्रांस के एक छोटे से गांव में हुआ था। लुई ब्रेल ने बचपन में ही अपने आंखों की रोशनी एक दुर्घटना की वजह से खो दी थी। दूसरे आंख की रोशनी भी उससे संक्रमित होकर धीरे-धीरे समाप्त हो गई किंतु लुई ने हार नहीं मानी और उन्होंने आगे चलकर छह डॉट पर आधारित एक ब्रेल लिपि की खोज की, जो दृष्टिबाधित लोगों के लिए शिक्षा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना। ब्रेल लिपि को स्पर्श के माध्यम से पढ़कर दृष्टिबाधित व्यक्ति अपने शैक्षिक उपलब्धियों को हासिल कर रहे हैं। वर्तमान समय में प्रौद्योगिकी का चाहे जितना विकास हो जाए, वह ब्रेल का स्थान ग्रहण नहीं कर पा रही और उसकी उपयोगिता आज भी बरकरार है ।लुई ब्रेल की तस्वीर पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। साथ में यूनिवर्सल ब्रेल किट सामग्री से दृष्टिबाधित बच्चों को अवगत कराया गया। बहुत से दृष्टि बाधित बच्चों ने कार्यक्रम में संगीतमय प्रस्तुति दी। अंत में सभी बच्चों तथा अन्य प्रतिभागियों को स्वल्पाहार दिया गया। इस उपलक्ष्य में सीआरसी छतरपुर द्वारा ऑनलाइन माध्यम से लोगों के लिए जन जागरूकता कार्यक्रम का भी संचालन किया गया जिसमें सीआरसी अंडमान में कार्यरत योगवती मुथु टी. रिसोर्स पर्सन के के रूप में सम्मिलित हुई तथा उनके द्वारा भी राष्ट्रीय वेबीनार के माध्यम से लोगों तक जानकारी उपलब्ध कराई गई एवं लुई ब्रेल के जीवन संघर्षों के बारे में चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में में 100 से अधिक व्यक्तियों ने प्रतिभाग किया।सीआरसी छतरपुर के निदेशक श्री राजमणि पाल ने कार्यक्रम की सफलता पर सबको बधाई दी तथा दिव्यांग जनों के हितार्थ इस तरह के अन्य कार्यक्रमों को आयोजित करने हेतु सुझाव दिए।








