
ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ सांस्कृतिक एवं सम्मान समारोह
छतरपुर। 3 जनवरी राष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर शहर के ऑडिटोरियम में सावित्रीबाई फूले जयंती मनाई गयी। जयंती पर मूवमेंट 21 समिति द्वारा अनेक सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 3 शिक्षकों को सम्मानित किया गया एवं सभी को शपथ दिलाई गयी। इस आयोजन की विशेष बात यह रही कि कार्यक्रम समाप्ति के बाद मूवमेंट 21 के सदस्यों ने कार्यक्रम स्थल पर सफाई की और पूर्व से बेहतर और स्वच्छ किया। आयोजन समिति मूवमेंट 21 सदस्यों द्वारा बताया गया कि सावित्रीबाई फूले द्वारा वर्ष 1848 में महिलाओं और वंचित समुदायों के बच्चों के लिए भारत की पहली पाठशाला प्रारम्भ की गयी और वे भारत की पहली महिला शिक्षक बनी। इस प्रकार उन्होंने हमारे देश की सभी महिलाओं और बहुसंख्यक वंचित लोगों के लिए शिक्षा के द्वार खोले जिनके लिए हजारों वर्षों से शिक्षा प्रतिबंधित थी। शिक्षा के क्षेत्र में उनके इस अतुलनीय योगदान ले लिए, उनके जन्म दिवस 3 जनवरी को हमारे देश में राष्ट्रीय शिक्षक दिवस मनाया जाता है। सावित्रीबाई पहले स्वयं शिक्षित हुयी और फिर उनके पति जोतिबाफूले के साथ मिलकर उन्होंने महिलाओं और वंचितों के लिए अनेक शालाएं खोली। इसके लिए उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा। असमानता पर आधारित समाज से उन्हें अनेक प्रताडऩाएं और अपमान सहना पड़ा पर वे रुकी नहीं और शिक्षा का कार्य निरंतर जारी रखा। सावित्रीबाई बाई एक कवयित्री थी और महिला-पुरुष समानता की प्रणेता थी। मूवमेंट 21 द्वारा 3 जनवरी को प्रति वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक दिवस मनाता है और सभी को गुणवत्ता पूर्ण समान शिक्षा प्राप्त हो इस दिशा में निरंतर कार्य करता है।शहर के ऑडिटोरियम में मूवमेंट 21की छतरपुर इकाई द्वारा उत्साहपूर्ण वातावरण में राष्ट्रीय शिक्षक दिवस मनाया गया। मूवमेंट 21 के अनेक सदस्य, उनके परिवार के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में आमजन इस उत्सव का हिस्सा बने। इस अवसर पर अनेक सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किये गए जिसमें गायन, नृत्य, लघु नाटिका, क्विज, आदि शामिल थे। सावित्रीबाइ फुले के कार्यों को याद किया गया और उनके अतुल्य योगदान के लिए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गयी। इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षक प्रोफेसर के.बी. अहिरवार, प्रोफेसर एनके पटेल एवं अध्यापक एच.एल. अहिरवार और अन्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि गानों के माध्यम से सावित्रीबाई फुले के कार्यों के साथ साथ शिक्षा के महत्व, सामाजिक और लैंगिक समानता, सामाजिक सौहार्द और पर्यवरण के संरक्षण की सीख दी गयी।









