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इटली के समुद्र तट पर पहली बार बना असंख्य शिवलिंगों का दिव्य धाम, विश्व शांति के लिए हुआ वैदिक अनुष्ठान

इटली के समुद्र तट पर पहली बार बना असंख्य शिवलिंगों का दिव्य धाम, विश्व शांति के लिए हुआ वैदिक अनुष्ठान

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छतरपुर। विश्व शांति, प्रेम एवं क्षमा यात्रा के अंतर्गत इटली के काऊरले पोर्तो सांता मार्गेरिटा के समुद्र तट पर पहली बार असंख्य आटे के शिवलिंगों का निर्माण कर विशेष वैदिक अनुष्ठान संपन्न किया गया। भारतीय सनातन संस्कृति के “वसुधैव कुटुम्बकम्” के संदेश को समर्पित इस आयोजन में विश्व शांति, मानव कल्याण, प्रेम, करुणा एवं दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए वैदिक मंत्रोच्चार, शांति पाठ और सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इसे इटली के धार्मिक एवं सांस्कृतिक इतिहास में एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन माना जा रहा है।
यह आयोजन वल्र्ड गिनीज बुक में नाम दर्ज परम पूज्य पंडित देव प्रभाकर शास्त्री (दद्दा जी) की आध्यात्मिक परंपरा के अनुरूप उनके परम शिष्यों द्वारा संपन्न कराया गया। कार्यक्रम का संयोजन श्री मतंगेश्वर सेवा समिति, खजुराहो एवं दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर के प्रमुख पंडित सुधीर कृष्ण शर्मा तथा कोटा निवासी अरिकेश जोशी (नीनू भैया) ने किया। प्रात: 5:40 बजे उगते सूर्य की प्रथम किरणों के साथ समुद्र तट पर शिवलिंग निर्माण प्रारंभ हुआ, जो लगभग साढ़े तीन घंटे तक चला। श्रद्धालुओं ने आटे से असंख्य शिवलिंग बनाकर भगवान शिव का पूजन-अर्चन किया और सुबह 9 बजे पूर्णाहुति के साथ अनुष्ठान का समापन हुआ।
अनुष्ठान के दौरान भारत एवं विश्वभर की सनातन संस्कृति से जुड़ी ब्रह्मलीन आत्माओं की शांति के लिए विशेष वैदिक शांति पाठ किया गया। श्रद्धालुओं ने अपने दिवंगत माता-पिता एवं पूर्वजों के निमित्त भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए विश्व में शांति, सद्भाव और मानवता के कल्याण की प्रार्थना की। कार्यक्रम में इटली के उद्योगपति रेनातो सार्तेलो, कृष्णभक्त मारको, होटल व्यवसायी दोलोरेस मोरो, योगाचार्य जियानलुका, आयुर्वेद विशेषज्ञ बारबारा, रोम निवासी रफाएला लोरेन्जेट्टी, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता इनात्सियो फियोरे सहित अनेक श्रद्धालु शामिल हुए।
कार्यक्रम के समापन पर प्रसिद्ध डायमंड व्यवसायी पंडित विनोद गौतम के सौजन्य से प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर उन्होंने विश्व शांति, प्रेम एवं क्षमा यात्रा के अगले चरण के लिए यूरोप की राजधानी ब्रुसेल्स (बेल्जियम) आने का आमंत्रण भी दिया। आयोजन में उपस्थित लोगों ने इसे भारतीय सनातन संस्कृति, पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, विश्वबंधुत्व और मानव कल्याण के संदेश का अनुपम उदाहरण बताते हुए इसकी सराहना की।

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