
उद्यानिकी विभाग के दो दिवसीय प्रशिक्षण में नवीन कृषि विधियों की दी गई जानकारी
छतरपुर। कलेक्टर पार्थ जैसवाल द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन में किसान भाईयों को बागवानी फसलों के उन्नत उत्पादन, प्रबंधन तकनीकों एवं नवीन कृषि विधियों की उद्यानिकी विभाग द्वारा दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन कर जानकारी दी गई। प्रशिक्षण नौगांव के कृषि विज्ञान केन्द्र में उद्यान विभाग के सहायक संचालक जगदीश मुजाल्दा के मार्गदर्शन में शुक्रवार को सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र की प्रमुख एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीणापाणि श्रीवास्तव ने की और कृषकों को उद्यानिकी से संबंधित तकनीकी जानकारी भी प्रदान की गई। समापन के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जनपद सदस्य एवं कृषि स्थाई समिति के सदस्य राजू यादव उपस्थित रहे।
उद्यानिकी विषय पर विस्तृत चर्चा डॉ. कमलेश अहिरवार (वैज्ञानिक, उद्यानिकी) द्वारा की गई। जिसमें फल, फूल एवं सब्जियों की उन्नत खेती तकनीकों पर आधारित नर्सरी प्रबंधन, टिशू कल्चर एवं ग्रीनहाउस खेती की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की फल, फूल व सब्जियों की खेती के लिए उपयुक्त मौसम एवं सिंचाई प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा की। फल, फूल एवं सब्जियो में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोग नियंत्रण के आधुनिक उपायों के बारे में किसान भाईयों को बताया गया। इस दौरान डॉ. बी. पी. सूत्रकार (परियोजना संचालक), आत्मा ने किसानों को कृषि एवं कृषि विभाग की अन्य योजनाओं के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की साथ ही कृषकों को सामयिक सलाह भी दी और मौसम वैज्ञानिक हेमंत कुमार सिन्हा द्वारा जलवायु परिवर्तन का बागवानी फसलों पर प्रभाव एवं उससे निपटने की रणनीतियों पर जानकारी दी। प्रशिक्षण में कृषकों को जलवायु अनुकूल बागवानी तकनीकों, औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के बढ़ते अवसरों एवं उद्यानिकी विभाग की योजनाओं के बारे में अवगत कराया गया। प्रगतिशील कृषक चितरंजन चौरसिया ने किसानों को जैविक खाद बनाने की विभिन्न विधियों के बारे में बताया। प्रशिक्षण उपरांत कृषकों को साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र में प्रदर्शित इकाइयां जैसे नर्सरी इकाई, उद्यानिकी फसल संग्रहालय इकाई, औषधि एवं सगंध प्रदर्शन इकाई, फल उद्यान उत्पादन इकाई इत्यादि इकाइयों का भ्रमण भी कराया गया और ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग तकनीक, हाई-डेंसिटी प्लांटेशन एवं ग्राफ्टिंग तकनीक का प्रायोगिक प्रदर्शन कराया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य नवीनतम बागवानी तकनीकों, जल प्रबंधन, जैविक खेती, एवं रोग-कीट नियंत्रण पर व्यावहारिक ज्ञान किसान को देना था। ताकि जिले में उन्नत बागवानी तकनीकों के प्रति रुचि बढ़े और उत्पादन में वृद्धि हो सके। दो दिवसीय प्रशिक्षण में जिले के 8 विकासखंडों से आए 300 से अधिक कृषक एवं महिलाओं सहित अन्य रिटायर्ड अधिकारी भी शामिल हुए।








