
शहर का बाबूराम चतुर्वेदी स्टेडियम अब नए रंग रूप के साथ दिखेगा अद्भुत

छतरपुर। नगर के एकमात्र और ऐतिहासिक स्टेडियम के भविष्य को लेकर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। वजह रावण दहन का मुद्दा है जो बुधवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित शांति समिति की बैठक में छाया रहा। जबकि निर्माण और विकास कार्यों के कारण फिलहाल स्टेडियम में सभी प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। ओलंपिक मानक पर स्टेडियम के विकास पर पांच करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं।
फिलहाल अक्टूबर में रावण दहन किए जाने का मुद्दा गरमाया हुआ है। नगर की दोनों रामलीला समितियों का मत है कि स्टेडियम पर ही रावण दहन किया जाएगा। यद्यपि इस पर तुरंत कोई निर्णय नहीं लिया गया है। परंतु विकल्प के तौर पर हाकी मैदान, हायर सेकंडरी स्कूल नंबर एक, मेला ग्राउंड तथा रेलवे स्टेशन के ग्राउंड का प्रस्ताव रखा गया है। रेलवे स्टेशन और हाकी ग्राउंड का प्रस्ताव बैठक में ही खारिज कर दिया गया है।
स्टेडियम में नगर की खेल प्रतिभाओं के उन्नयन हेतु एक शानदार और जानदार ग्राउंड तैयार हो गया है। जिसमें सभी वर्गों के युवा भाग ले सकते हैं। इसमें हमारे आपके बच्चे भी शामिल हैं। अब यह निर्णय मैं नगरवासियों पर छोड़ता हूं कि वह शहर में ऐसा मैदान चाहतें हैं कि नहीं।
हायर सेकंडरी स्कूल नंबर एक का मैदान विकल्प हो सकता है। यह मेरा निजी मत है। दोनों रामलीला समितियों और जिला प्रशासन को गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए। आखिर हम वर्तमान पीढ़ी को क्या देना चाहते हैं, क्या पांच करोड़ रुपए का धुंआ देखना चाहते हैं? यह मामला पूरे शहर का है। नगर में अध्ययन रत विद्यार्थियों, साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, खेल प्रतिभाओं का भी कुछ हक बनता है कि नहीं? कृपया नगर के हित में गंभीरता पूर्वक विचार कीजिए। शहर अपना है।
हमारे आराध्य प्रभु श्रीराम ने कभी भी मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं किया। फिर वह तो रावण है। जिसने अपने अहंकार के कारण अपने पूरे वंश का सर्वनाश कर डाला था।
मैंने जब से होश संभाला है तब से यह स्टेडियम ग्राउंड देखता आ रहा हूं। पहले यहां पर एक ओर आमसभा के लिए मचान जैसा एक सभा मंच हुआ करता था। यह ऐतिहासिक स्टेडियम इसलिए है कि यहां पर एक आदर्श शिक्षक एस. एन. बनर्जी की स्मृति में अखिल भारतीय स्तर का फुटबॉल टूर्नामेंट आयोजित किया जाता था। जिसे देखने के लिए ज़िले भर से हजारों दर्शक आते थे। छतरपुर नगर का यह एकमात्र मनोरंजन का साधन हुआ करता था।
1990 में भाजपा सरकार के दौरान पदस्थ कलेक्टर एम. के. राउत का स्टेडियम के चहुंमुखी विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने बिना सरकारी निधि के अपने निजी प्रयासों से जीवन दान दिया था।
हाल ही में स्थानांतरित हुए कलेक्टर संदीप जी आर ने छतरपुर जिले के युवाओं की खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा शारीरिक श्रम को बढ़ावा देने के लिए विकास योजना तैयार की और उसे अमलीजामा पहनाया।
छतरपुर जिले के इतिहास में संभवतः यह पहला अवसर है जब डीएमएफ फंड यानी खनिज रायल्टी से प्राप्त राशि का उपयोग किया गया है। खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए यहां पर ओलिंपिक मानक का 400 मीटर का एक लेन का रनिंग ट्रेक बनाया गया है। फुटबॉल ग्राउंड (नेचुरल ग्रास) तैयार हो गया है। इसके अलावा बड़े बड़े स्पोर्ट्स ग्राउंड की तरह मल्टी स्पोर्ट्स ग्राउंड तैयार किया गया है। जिसमें वालीबाल, क्रिकेट, कबड्डी आदि के शौकीन युवा प्रेक्टिस कर सकते हैं। इसी प्रकार के ग्राउंड नौगांव, बिजावर एवं बड़ामलहरा तथा अन्य तहसील मुख्यालय पर भी तैयार हो रहे हैं। छतरपुर स्टेडियम के वर्तमान निर्माण और विकास कार्यों पर पांच करोड़ रुपए व्यय किए जाने का अनुमान है।
यह स्टेडियम राजनीतिक दलों की आमसभा के अलावा दशहरा के दिन रावण दहन का इकलौता स्थान रहा है। संभवतः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की अंतिम आमसभा यहां पर हुई थी। उसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया गया था।
समय और परिस्थितियों के साथ बहुत कुछ बदल चुका है और आगे भी यह सिलसिला चलता रहेगा। किसी ने कभी सोचा था कि छतरपुर नगर को फोरलेन की सौगात मिलेगी। इसके निर्माण पर हजारों पेड़ों की बलि चढ़ा दी गई। क्या हम उन पेड़ों का जीवन बचा सके? वर्तमान पीढ़ी का अरमान था कि अपने जीवन में छतरपुर नगर में रेलवे लाइन देख लें। आज़ कितनी ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।








