Home छतरपुर मन की तरह हरा-भरा हो वातावरण

मन की तरह हरा-भरा हो वातावरण

Jeevan Ayurveda

सुश्री हिमांशी बजाज

छतरपुर। कवी जॉयस किल्मर कहते है की पेड़ जितनी प्यारी कविता कभी नहीं दिखेगी। इन पंक्तियों के पीछे एक गहरा भाव छुपा है। जिससे आज पर्यावरण दिवस के महत्त्वपूर्ण दिन पर समीक्षा करना हमारा दायित्व है। पेड़ हमारे अस्तित्व का अभिन्न अंग है। इन पर हमारी निर्भरता है। कभी धूप में छाया देते हैं तो कभी हमारे भोजन का स्त्रोत भी बनते है। व्यवसायिक क्षेत्र, फैक्ट्रियां, उद्योग इत्यादि के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने का कार्य करते है। इसके अलावा पेड़ अपनी जड़ों से मिट्टी को ठोस बनाए रखते है। इसके साथ ही जल स्तर को काफी समय तक धरती की ऊपरी सतह तक रोक कर रखते हैं। पेड़ों ने ही वातावरण को संजोए रखा है। कलात्मक रूप से भी इनकी महत्ता बनी हुई है। वाद्य यंत्रों, फर्नीचर आदि के लिए लकड़ी की आवश्यकता का स्त्रोत है और यही वाद्य यंत्र ही हमारे सुरमई जीवन के स्त्रोत है। मानसिक रूप से भी पेड़ों का सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट देखा जा सकता है, हम छुट्टियों में हमेशा जंगल की तरफ सुकून की तलाश करते है। आध्यात्मिक क्षेत्र की कल्पना भी पेड़ों के बिना अधूरी लगती है। भगवान बुद्ध ने भी पेड़ों की छांव से मिलने वाले शांत्विक संतुलन को समझते हुए ज्ञान प्राप्ति यथार्थ सत्य एक पेड़ ही हैं। पेड़ चाहे पीपल का हो या बरगद का फिर चाहे नीम का हमेशा अलग अलग अनुभव कराता है। आयुर्वेद चिकित्सा में भी औषधी के रूप में पेड़ अमूल्य है। आदिकाल में सम्पूर्ण चिकित्सा और उपचार पेड़-पौधों पर ही निर्भर था। हर पेड़ में एक न एक औषधीय गुण समाहित है। जब तक मनुष्य किसी पेड़ को नहीं का तब तक वह अपनी जड़ें नही छोड़ता है। जिससे हमें यह सीख भी मिलती है कि अगर किसी चीज को दृढ़ता से हम अपना लें तो उसे पूरी इच्छा शक्ति के साथ उसका साथ निभाएं। मेरी ओर से 5 जून के पर्यावरण दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं और आपसे एक छोटी सी अपील है कि आप कम से कम एक पेड़ जरूर लगाएं और उसकी देखभाल पूरी जिम्मेदारी से करें। छतरपुर को और मध्य प्रदेश को हरा-भरा बनाएं। साथ ही अपने आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक सुंदर वातावरण तोहफे में देकर जाएं।

– सहायक संचालक

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