
छतरपुर। श्री कृष्णा़ विश्वाविद्यालय छतरपुर में छात्र जीवन में आध्यात्म का महत्व विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में नवोदित प्रखर वक्ता मास्टर सुयश शर्मा विशिष्ट अतिथि डॉ. सुनील शर्मा वरिष्ठ होम्योपैथ चिकित्सक, विनोद खेडिय़ा, मैनेजिंग डायरेक्टर, किसान मिनरल प्राइवेट लिमिटेड, पंकज रिछारिया मैनेजिंग डायरेक्टर माइनिंग डिपार्टमेंट, डॉ. बी एस राजपूत, डॉ. आकाश सिंह एवं डॉ. महेश जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. बृजेन्द्र सिंह गौतम ने की।संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों द्वारा सरस्वती प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर दीप प्रज्जवलन उपरांत किया गया। सर्वप्रथम विशिष्ट अतिथि विनोद खेडिया ने अपने जीवन के प्रेरक प्रसंग साझा किये। तत्पश्चात मुख्य अतिथि मास्टर सुयश शर्मा ने गणेश वंदना से अपने विचारों की शुरूआत की। शिव तांडव श्लोक का वाचन किया और छात्र के जीवन में आध्यात्म के महत्व को बताया। साथ ही बताया कि किस तरह छात्र गलत विचारों में पड़कर भटक जाते हैं इस पर अपने विचार प्रस्तुत किये। उन्होंने बताया कि मां और दादा जी की प्रेरणा से एवं उनकी दी हुई सीख से बचपन से ही वह आध्यात्म की ओर रहे हैं। आध्यात्म में ही उनके मन को भटकने से रोका है।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. गौतम ने अपने उद्बोधन में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि जो आदमी आपसे प्रेम करता है उसे ही धोखा दिया जा सकता है। जो आपसे प्रेम नही करता है उसे धोखा देना आसान नही है। आत्म विश्लेषण एवं आत्म मूल्यांकन संबंधी जानकारी से अवगत कराते हुये बताया कि नवोदित प्रखर वक्ता मास्टर सुयश शर्मा छठवीं क्लास में पढ़ते हुये इनका बौद्धिक स्तर कितना अच्छा होगा। आध्यात्म का अभिप्राय सिर्फ सुबह उठकर पूजा पाठ भक्ति साधना से नही है। जो हम सोचते हैं ऐसा नही है कि वह हमें मिल ही जाये। जो हम सोचते नही है हमें वह भी मिल जाता है। उन्होंने किसान मिनरल प्राइवेट के मैनेजिंग डायरेक्टर से एमओयू की बात कही। अतं में डॉ. गौतम ने उपस्थित अतिथियों का साधुवाद करते हुये शाल श्रीफल से सम्मान किया। इस अवसर पर विश्विविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगणों सहित छात्र छात्राऐं उपस्थित रहे। संगोष्ठी का सफल संचालन डॉ. प्रणति चतुर्वेदी ने किया।







