
संविधान लागू होने के अमृत महोत्सव पर हुई संगोष्ठी
छतरपुर। वरिष्ठ पत्रकार और लेखक राजेश बादल ने कहा है कि जिन मूल्यों पर हमारा संविधान टिका है आज उनका क्षरण हो रहा है क्योंकि हमने संविधान को दिलों में नहीं धड़काया। वे रविवार की दोपहर गांधी आश्रम में व्यवहार में संविधान विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में व्याख्यान दे रहे थे। इसका आयोजन सामाजिक संस्था विकास संवाद ने किया था। संगोष्ठी की अध्यक्षता मोतीलाल नेहरू लॉ कालेज के प्राचार्य डॉ रजत कुमार सतपथी ने की।
संगोष्ठी में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद दीक्षित, वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार श्याम किशोर अग्रवाल, सुरेंद्र अग्रवाल, रवींद्र व्यास, लखन लाल चौरसिया, रामकिशोर अग्रवाल, रविंद्र अरजरिया, पप्पू गुप्ता, शिवेंद्र शुक्ला, अंकुर यादव, दिलीप सोनी, प्रवीण गुप्त, पूर्व कुलसचिव डॉ जेपी मिश्र, डॉ एसआर पॉल, गांधीवादी प्रेम नारायण मिश्र सहित अधिवक्ता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, लॉ कालेज के छात्र, छात्राएं, पत्रकारों और गणमान्य नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
मुख्य वक्ता राजेश बादल ने कहा कि वर्ष 1919 में गांधी जी ने विचारों की अभिव्यक्ति का मुद्दा उठाकर संविधान की नींव रख दी थी। उस नींव की बदौलत आज हम यहां खड़े हैं। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने हाल ही में कहा है कि हमारा संविधान जीवित संविधान है। उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी के संदर्भ में 44 साल पहले छतरपुर में हुए संघर्ष का जिक्र कर बताया कि छतरपुर का संघर्ष देश के इतिहास में मील का पत्थर है।
श्री बादल ने कहा कि हमारा संविधान दुनिया का सर्वश्रेष्ठ संविधान है और इसी संविधान से देश में लोकतंत्र कायम है। उन्होंने बताया कि राज्यों में तो राष्ट्रपति शासन लग सकता है लेकिन देश में राष्ट्रपति शासन न लगाने की संविधान निर्माताओं की व्यवस्था के पीछे लोकतंत्र बचाने का भाव निहित है। लोकतंत्र की बुनियादी बात असहमति है। उन्होंने कहा कि डेढ़ हजार साल पहले बिहार के वैशाली में लोकतंत्र था। फिर सामंती राज आया और अंग्रेजों ने तो सारी हदें पार कर दीं। तभी से हमारे अंदर दासता का भाव पैदा हुआ जो अभी तक बना हुआ है।
श्री बादल ने संवैधानिक मूल्य, व्यक्ति की गरिमा, स्वतंत्रता, समानता, बंधुआ, संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र की विभिन्न दृष्टांतों के जरिए विस्तृत व्याख्या कर उनके व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने प्रश्नोत्तर सत्र में कुछ लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ सतपथी ने कहा कि लोकतंत्र मजबूत तभी होगा जब विपक्ष मजबूत होगा। तभी हम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा कर पाएंगे। इसके पहले विकास संवाद के वी एन त्रिपाठी ने आयोजन और संस्था की जानकारी दी। गांधी आश्रम की दमयंती पाणी ने सभी को संविधान की प्रस्तावना की शपथ दिलाई। अधिवक्ता उर्मिला अहिरवार ने स्वागत भाषण दिया जबकि संचालन निदा रहमान ने किया। पत्रकार डॉ नारायण सिंह परमार ने आभार व्यक्त किया।








