
संकट मोचन, गायत्री सरोवर, ग्वाल मंगरा तालाब में गंदगी का अंबार
छतरपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या में होने जा रही राम मंदिर प्रतिष्ठा के पूर्व 14 जनवरी से 21 जनवरी तक देश भर के मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर सफाई अभियान चलाने की अपील की थी। इस अपील के बाद छतरपुर में भी कलेक्टर संदीप जीआर के निर्देश पर सफाई अभियान के लिए नगर निकाय संस्थाओं के अधिकारियों को आदेशित किया गया। कैमरे के सामने कुछ मंदिरों के बाहर नेताओं और अधिकारियों ने साफ-सफाई करने की मुहिम तो चलाई लेकिन यह अभियान सिर्फ फोटो खिंचाने तक ही सीमित रहा। छतरपुर के तीन प्राचीन मंदिरों के पास मौजूद तालाब इस अभियान में शामिल ही नहीं हुए। इन तालाबों में जमकर गंदगी है जिसे नगर पालिका ने अनदेखा कर दिया।
कचरे के मैदान बने हमारे तालाब छतरपुर शहर के तालाबों की दुर्दशा सुधरने का नाम नहीं ले रही है। नगर पालिका की बेरूखी और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से ये तालाब अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। एक तरफ तो इन तालाबों के चारों तरफ जमकर अतिक्रमण हो रहा है तो वहीं दूसरी तरफ गटर से आने वाले गंदे पानी और कचरे के कारण इन तालाबों का पानी जहरीला हो गया है। जो तालाब कभी शहर की सुंदरता बढ़ाते थे वे तालाब अब गंदगी और कचरे के मैदान के रूप में नजर आ रहे हैं। दुखद बात ये है कि पूजा पाठ के लिए भी मंदिरों से सटे संकट मोचन तालाब, नंदीवाला मंदिर से सटे ग्वाल मंंगरा तालाब और गायत्री मंदिर तालाब की हालत बदतर बनी हुई है। इन तालाबों की सफाई न होने के कारण स्थानीय लोग नाराज हैं।
इनका कहना-
नगर पालिका के अधिकारियों ने कलेक्टर के आदेश को भी नहीं माना। कलेक्टर ने मंदिरों के साथ-साथ तालाबों और इनके घाटों की स्वच्छता के लिए भी निर्देश दिए थे लेकिन छतरपुर नगर पालिका तालाबों के रखरखाव और स्वच्छता के मामले में लापरवाह बनी हुई है।
राजेन्द्र अग्रवाल, समाजसेवी








