छतरपुर। जिले में पुलिस कर्मियों द्वारा एक महिला एवं उनके पति के साथ कथित मारपीट, अभद्रता और झूठे प्रकरण में फंसाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर घटना के विरोध में सवर्ण अधिकारी कर्मचारी एवं सामान्य वर्ग उत्थान संगठन ने मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई कर पीडि़त दंपति को न्याय नहीं दिलाया गया, तो प्रदेश भर में उग्र आंदोलन और आमरण अनशन किया जाएगा। ज्ञापन सौंपने के पश्चात संगठन के पदाधिकारियों ने डाकखाना चौराहा पहुंचकर महाराजा छत्रसाल एवं छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर न्याय की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया।
जानकारी के अनुसार, नौगांव जेल चौराहा निवासी फरियादिया श्रीमती सुषमा तिवारी पति प्रमोद तिवारी ने संगठन को बताया कि 28 सितंबर को वे अपने पति के साथ छतरपुर आई थीं। आईजी सागर रेंज से फरियाद लगाने के उद्देश्य से वे सिटी कोतवाली पहुंचे, जहां से आईजी के सिविल लाइन रवाना होने की जानकारी मिली। पीडि़ता का आरोप है कि सिविल लाइन जाने के दौरान रास्ते में पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोका और उनके साथ कथित मारपीट, अश्लील गालियां व छेडख़ानी की। इसके साथ ही उनके पति पर धारा 151 के तहत फर्जी मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया। पीडि़ता ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान चोरी गए सोने की बरामदगी व जब्ती में भी भारी हेरफेर की गई है। पीडि़त परिवार मानसिक दबाव व असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर है। इस पूरे प्रकरण की जांच विभागीय अधिकारियों के बजाय किसी निष्पक्ष एजेंसी, मजिस्ट्रेट अथवा सीबीआई/सीआईडी से कराने की मांग की गई है। संगठन ने दो टूक कहा है कि समय-सीमा में न्याय न मिलने पर पूरे बुंदेलखंड में धरना-प्रदर्शन शुरू होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।










