Home छतरपुर एमसीबीयू हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो.पुष्पा दुबे की सेवानिवृत्ति पर भव्य विदाई

एमसीबीयू हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो.पुष्पा दुबे की सेवानिवृत्ति पर भव्य विदाई

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छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर की हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो पुष्पा दुबे का भव्य विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस आयोजन में हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा दुबे, चित्रकला विभागाध्यक्ष डॉ. एस.के. छारी, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. बी.पी.एस. गौर, दर्शनशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. जे.पी. शाक्य, संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. शीला नायक, हिन्दी विभाग से ही प्रो.उषा शुक्ला, प्रो. गायत्री वाजपेई, प्रो. बहादुर सिंह परमार, सह प्राध्यापक डॉ. कुंजीलाल पटेल, सहायक प्राध्यापक नंदकिशोर पटेल, अतिथि विद्वान द्वय डॉ. जसरथ अहिरवार व दिव्यांश खरे, हिन्दी के शोधार्थी एवं स्नातक, स्नातकोत्तर के छात्र – छात्राओं की गरिमामय उपस्थिति रही। विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा दुबे का पुष्पगुच्छ एवं शाल – श्रीफल से स्वागत किया गया। साथ ही छात्रा पूर्वी राजा द्वारा स्वागत गीत का सस्वर गायन किया गया। विभाग की ओर से प्रदत्त सम्मान पत्र का वाचनश्री दिव्यांश खरे द्वारा किया गया। इस विदाई के अवसर पर स्नातकोत्तर के छात्र-छात्राओं ने विदाई गीतों के साथ भावविभोर प्रस्तुतियां दीं। छात्र दयाशंकर पटेल, मानसी चौरसिया ने विदाई पर अत्यंत मार्मिक स्वरचित कविता का वाचन किया। शोधार्थी शुभम राठौर एवं सरला प्रजापति ने कविता पाठ के माध्यम से अपने भाव व्यक्त किए। शोधार्थी कल्याण सत्यकामी ने भी विभागाध्यक्ष के प्रति अपने भाव एवं अनुभव व्यक्त किए। अतिथि विद्वान डॉ.जसरथ अहिरवार और दिव्यांश खरे द्वारा भी मार्मिक अनुभव साझा किए गए।विदाई के अवसर पर डॉ. पुष्पा दुबे ने कहा कि गाड़ी तो चलती ही दो पहियों से है। हिन्दी विभाग तो बड़ा विभाग था, तो उसके पहिए भी बड़े थे। इस महाविद्यालय ने मुझे बहुत कुछ दिया है। इसके लिए मैं महाविद्यालय की बहुत – बहुत शुक्रगुजार हूँ। मैने इस महाविद्यालय से पढ़ा, यहीं नौकरी की और जब यह विश्वविद्यालय बना तब मुझे आशा से ज्यादा पद यहां प्राप्त हुए। विश्वविद्यालय की याद हमेशा आएगी। कार्यक्रम के आयोजन हेतु विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं विभाग के सदस्यों का आभार प्रकट किया। अंत में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को जीवन में आगे पढऩे हेतु पढ़ते रहने को प्रोत्साहित किया। इस समारोह का संचालन सहायक प्राध्यापक नंदकिशोर पटेल ने किया। अंत में डॉ. बहादुर सिंह परमार द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।

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