
छतरपुर। हमें अपना जीवन खुशनुमा होकर गुजारना है या फिर रोते-रोते गुजारना है यह निर्णय किसको करना पड़ेगा? हमें स्वयं। जब हम यह कहते हैं की जीवन बहुत कठिन है, बहुत बाधाएं, परेशानियां, टेंशन है तो आप विचार करिए कि ऐसी सोच से हमारा जीवन कैसा होगा। अपने जीवन को खुशनुमा बनाने के लिए हमें अपने विचारों पर ध्यान देना होगा।उक्त उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय किशोर सागर द्वारा शहनाई गार्डन में ब्रह्माकुमारीज़ के समाज सेवा प्रभाग के अंतर्गत महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर “आओ आध्यात्मिक अलख जगाएं, एक दिव्य समाज बनाएं, कार्यक्रम में बीके रीना ने व्यक्त किये।इस अवसर पर बीके कल्पना ने कहा कि ईश्वर के रूप में सभी धर्म की आत्माओं ने निराकार ज्योति बिंदु स्वरूप को स्वीकार किया है भले उनके नाम अलग-अलग रखे लेकिन परमात्मा कहते हैं मेरा वास्तविक नाम एक है और वह है शिव और शिव का शाब्दिक अर्थ होता है कल्याणकारी इसलिए उनको सदाशिव कहते हैं जो सदा सबका कल्याण करते हैं। इसीलिए कहते हैं कि सबका मालिक एक है फिर भी बटा हुआ संसार है, सच पूछो तो सारी दुनिया अपना ही परिवार है।इस कार्यक्रम में समाजसेवी हरी अग्रवाल, दर्शना सेवाकेंद्र जनरल सेक्रेटरी प्रभा विदु, दर्शना सेवाकेंद्र अधीक्षक राजेश गुप्ता, मैनेजर दिनेश वैध अन्य साथीगण, खाद्य वेयरहाउस डिप्टी मैनेजर वर्षा बरसैंया, श्याम बिहारी बरसैंया, संजय सक्सेना सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी बहनों ने अनेक प्रकार की एक्टिविटीज के माध्यम से सभी को आनंदमय जीवन जीने के लिए उत्साहित किया एवं बीके रीना ने मेडिटेशन कराया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने शिव का ध्वज फहराकर शिव आरती की तत्पश्चात बीके शिल्पा ने सभी को ईश्वरीय साहित्य एवं प्रसाद प्रदान किया।








