
छतरपुर। श्री कृष्णा विश्वविद्यालय के फार्मेसी संकाय के द्वारा 17 सितंबर से 23 सितंबर, 2024 के दौरान राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह का आयोजन बड़े ही उत्साह पूर्ण ढंग से किया गया है। विगत 6 दिनों के दौरान विभिन्न कार्यक्रमो जैसे फार्माकोविजिलेंस जागरूकता अभियान, विशेषज्ञ व्याख्यान, प्रश्नोत्तरी और पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान विभिन्न विशेषज्ञो द्वारा दवा के प्रतिकूल प्रभावों पर गहन चर्चा हुई।डॉ अमित कुमार जैन, डीन, फार्मेसी संकाय ने अपने उध्बोधन के दौरान दवाइयों के प्रतिकूल प्रभावो के रिपोर्टिंग को सुचारु रूप से करने मे फार्मासिस्ट के साथ साथ चिकित्सक, चिकित्सक सहायक, पंजीकृत नर्स, और प्राथमिक स्वास्थ केंद्रो में कार्यरत स्वास्थय कर्मियों, टीकाकरण कार्यक्रम से जुड़े स्वास्थ कर्मियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके साथ उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन, उपप्सला मॉनिटरिंग सेंटर और भारतीय फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम के कार्य प्रणालियों और जिम्मेदारियों के बारे मे अवगत करवाया ताकि दवाओं के जोखिम और लाभों की निगरानी और आकलन किया जा सके।फार्मेसी विभाग के वरिष्ठ प्रध्यापक अभिषेक पाठक ने विगत सालो मे कुछ दवाईयो के प्रतिकूल घटनाओं का जिक्र करते हुए उनके मूल्यांकन और समाधान मे फार्माकोविजिलेंस की भूमिका पर प्रकाश डाला।फॉर्मेसी विभाग के प्राध्यापक दीपेंद्र सिंह बुन्देला ने अपने वक्तव्य के दौरान दवाईयो की खोज में क्लिनिकल ट्रायिल्स की उपयोगिता पर अपने विचार रखे, इसके साथ उन्होंने दवाईयों के उपयोग के कारण होने वाली अनपेक्षित, हानिकारक घटनाओं के मुख्य कारण को बताया। उन्होंने बताया कि फार्माकोविजिलेंस के हम यह विश्लेषित कर सकते हैं कि कौन से दुष्प्रभाव रोगियों के लिए जोखिम के लायक हैं, इसकी तुलना में कि वे किसी बीमारी के इलाज में कितने प्रभावी हैं।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहें विश्वविद्यालय के उपकुलगुरू डॉ. गिरीश त्रिपाठी ने अपने वक्तव्य में कहा कि शरीर विभिन्न तरह के रसायनों से संचालित होता है। ये रसायन कोशिकाओं के रिसेप्टर अथवा अन्य क्रियाविधियों के माध्यम शरीर पर प्रतिकूल या अनुकूल प्रभाव डालते हैं। प्राय: एक रसायन शरीर में कई तरह की प्रक्रियाओं में सम्मिलित रहता दवा इन रसायनों को प्रभावित कर एक तरु अनुकूल असर करती हैं वही रसायनों की अन्य प्रक्रियाओं में प्रतिकूल अथवा हानिकारक प्रभाव डाल सकती है। अत: किसी दवा की स्वीकृति में उसकी उपयोगिता उसकी हानि से प्रभावी रहती है तो उसका भविष्य में और आंकलन कर प्रमाणिक तौर पर व्यवसायीकरण किया जा सकता है।फॉर्मेसी संकाय के विद्यार्थीओं द्वारा पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता मे क्रमश: प्रथम,द्वितीय और तृतीय स्थान रिजवान खान, प्रिन्सी सिंह सेंगर और संजय प्रजापति व तुलसा ने प्राप्त किया। उपस्थित अतिथियों ने प्रमाण पत्र प्रमाण कर उनका उत्साहवर्धन कर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं भी दी।श्री कृष्णा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. बृजेंद्र सिंह गौतम, चेयरमैन डॉ.पुष्पेंद्र सिंह गौतम, कुलगुरु डॉ.अनिल कुमार धगट , उपकुलगुरु गिरीश त्रिपाठी, कुलसचिव विजय सिंह, परीक्षा नियंत्रक डॉ.आशीष पचौरी, विश्वविद्यालय के विशिष्ट सलाहकार डॉ.बी एस राजपूत एवं अन्य पदाधिकारियों ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर शुभकामनाएं प्रेषित की।कार्यशाला के दौरान डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी विभाग के प्राध्यापकगण दीपेंद्र सिंह, दीपा सिंह, अभिषेक पाठक, शिल्पी रावत, कुलदीप तिवारी, अलोक अनुरागी, राहुल अहिरवार, रमेश अहिरवार एवं डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मच्यूटिकल् रिसर्च प्राध्यापकगण राम मिलन विश्वकर्मा, निलेश अनुरागी, मुस्कान गुप्ता, सोनाली विदुआ, सौरभ खरे, सुनील, नैन्सी आदि सभी ने अपनी सहभागिता दी।







