
छतरपुर। राज्य आनंद संस्थान के अल्पविराम कार्यक्रम का विशेष आयोजन सोमन दंपत्ति द्वारा किया गया। लाइफ ऑफ रिवर के माध्यम से उन्होंने अपने जीवन के उतार चढ़ाव की पूरी कहानी सुनाई, किस घटना ने उनकी जिंदगी बदल दी और वह सरकारी नौकरी के साथ-साथ समाज सेवा के कार्य में लग गए। इस अवसर पर आनंद विभाग के जिला संपर्क व्यक्ति लखनलाल असाटी, मास्टर ट्रेनर श्रीमती आशा असाटी, आनंदम सहयोगी शिवनारायण पटेल, रामकृपाल यादव, कृष्ण पाल सिंह परिहार, श्रीमती नीलम पटेल, मोहम्मद आबिद, अमित जैन, राजेश जैन आदि उपस्थित थे कार्यक्रम उपरांत दक्षिण भारतीय भोजन भी परोसा गया। जिला चिकित्सालय से रिटायर्ड केएन सोमन और श्रीमती विमला सोमन ने अपने जीवन की कहानी विस्तार से बताई। केरल के सबरीमाला पतनमतिट्टा जिला निवासी श्री सोमन ने बताया कि उनके पिता ने मजदूरी करके उन्हें पढ़ा तो दिया पर बोर्ड परीक्षा की फीस भरने उनके पास पैसे नहीं थे तब उनकी मां ने पड़ोस से रूपए 16 उधार मांग कर उनकी फीस भरी, उसके बाद वह रूपए 1 दिन के हिसाब से एक क्लीनिक में नौकरी करने लगे, वहां एक घटना ने उनकी जिंदगी बदल दी एक गरीब महिला अपने बच्चों की दवा लेने आई थी चिकित्सक ने कुछ दवा और गोली को मिक्स कर एक सीसी में उसे देकर 7 रुपए मांगे, महिला ने रूपए 5 देकर कहा कि रूपए 2 वह कल दे जाएगी, चिकित्सक ने महिला से दवा छीनकर अंदर जाकर वाशबेसिन में बहा दी और बाहर आकर कहा, यह कोई भीख मांगने की जगह नहीं है। इस घटना ने उनकी जिंदगी पर बहुत प्रभाव डाला और अब उन्होंने लैब टेक्नीशियन का कोर्स किया तथा मध्य प्रदेश के खुरई में रूपए 200 माह में प्राइवेट नौकरी करने लगे, पहली तारीख को वेतन मिलने पर वह नियमित रूप से रूपए 50 अपने माता-पिता को तथा रूपए 10 किसी न किसी गरीब को मनी आर्डर करते थे, वह जिसकी मदद करते थे उसे पहले से पता नहीं होता था अचानक मनी ऑर्डर पाकर उसे बेहद आश्चर्य होता था पर इसका हजारों किलोमीटर दूर से अनुभव कर सोमन जी खुश हुआ करते थे, प्रतिमाह रूपए 100 वेतन बढऩे पर उन्होंने अब गरीबों को 10 के बजाय रूपए 20 मनी ऑर्डर करने का कार्यक्रम जारी रखा और वह मानते हैं इसी का फल था कि ओवर एज होने के 3 महीने पहले उन्हें सागर जिले में सरकारी नौकरी मिल गई, और जब वह देवरीकला अस्पताल में पदस्थ हुए तो कुछ माह पहले ही पदस्थ हुई केरल की बिमला से उनकी शादी साथी कर्मचारियों के विशेष आग्रह और माता-पिता की सहमति से तय हो गई, शादी की तारीख उन्होंने मां-बाप को टेलीग्राम करके दी थी पर टेलीग्राम देर से पहुंचा और जब वह शादी करके घर पहुंचे तब दोनों के मां-बाप वहां से वर वधु को दिए जाने वाले उपहार की पेटी तैयार कर सागर की ओर चलने ही वाले थे, सरकारी नौकरी में भी उन्होंने अपनी समाज सेवा का कार्य जारी रखा और उनका अस्पताल मलेरिया नियंत्रण के मामले में सागर के साथ-साथ मध्य प्रदेश का आदर्श केंद्र माना जाने लगा, जहां सारा रिकॉर्ड दीवालों पर उन्होंने अपने हाथ से लिखा था। मैदान में काम करने वाले अस्थाई कार्यकर्ताओं को वह प्रत्येक माह अपनी तरफ से पुरस्कृत करने लगे, पैथोलॉजी में उनकी दक्षता और योग्यता को देखकर नागरिकों ने उनसे प्राइवेट पैथोलॉजी खोलने का बहुत दबाव बनाया पर वह इसके लिए कभी सहमत नहीं हुए अस्पताल में होने वाले सभी परीक्षण का वह रात 2 बजे तक जाकर पूरा डाटा तैयार करके ही सोते थे, 2018 में वह जब भोपाल में अल्पविराम कार्यक्रम में सम्मिलित हुए तब से उन्होंने अपने जीवन को ईमानदारी कर्तव्य निष्ठा और समाज सेवा के साथ और मजबूती से जोड़ दिया।








