Home छतरपुर श्रीमद् भागवत कथा श्रृंखला -2

श्रीमद् भागवत कथा श्रृंखला -2

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अच्छे और बुरे कर्मो का फल हर किसी को भोगना ही पड़ता है- कौशिक जी

छतरपुर। भगवान पदार्थ से परे, प्रेम के अधीन है। प्रभु को मात्र प्रेम ही चाहिए। अगर भगवान की कृपा दृष्टि चाहते है तो हमें सच्चाई की राह पर चलना चाहिए। भगवान का दूसरा नाम ही सत्य है। सत्यनिष्ठ प्रेम के पुजारी भक्त भगवान को अति प्रिय होते है। ये उद्गार चेतगिर मंदिर मेें चल रही भागवत कथा में शुक्रवार को भगवती प्रसाद जी कौशिक ने प्रकट किए।श्री कौशिक जी कहते है कि भागवत का आश्रय करने वाला कोई भी दुखी नहीं होता है। भगवान शिव ने शुकदेव बनकर सारे संसार को भागवत सुनाई है। उन्होंने श्रोताओं को कर्मो का सार बताते हुए कहा कि अच्छे और बुरे कर्मो का फल हर किसी को भोगना ही पड़ता है। भीष्म पितामह का उदाहरण देते हुए आचार्य श्री कहते है कि भीष्म पितामह वाणों की शैय्या पर लेटे हुए भगवान श्रीकृष्ण से पूछते है कि मैंने ऐसे कौन से पाप किये है कि 6 माह से वाणों की शैय्या पर लेटा हूं पर प्राण नहीं निकल रहे है। इस पर श्री कृष्ण ने उनसे कहा कि पिछले जन्म में जब आप राजकुमार थे और घोड़े पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। उसी दौरान आपने एक नाग को जमीन से उठाकर फेंका तो वह कांटों पर जा गिरा। जहां वह 6 माह तक पड़ा रहा तब जाकर उसके प्राण निकले। उसी कर्म का फल है जो आप 6 महीने तक वाणों की शैय्या पर लेटे है। इसका मतलब है कि कर्म का फल सभी को भोगना होता है। इसलिए कर्म करने से पहले कई बार सोचना चाहिए।दक्षयज्ञ प्रसंग सुनाते हुए महाराज श्री कहते है कि यज्ञ का उद्देश्य पवित्र होना चाहिए। दक्ष कर्मयोगी था, कर्मठ था, किंतु कर्म का उद्देश्य उसने अपवित्र रखा, शिव के अपमान का लक्ष्य रखा, जिसका परिणाम यह निकला कि उसका यज्ञ भंग हो गया और स्वयं का शिरोच्छेदन हुआ। कर्म का उद्देश्य यदि पवित्र हैं तो वह कर्म यज्ञ कहलाता हैं। श्री कौशिक जी कहते है कि भक्ति में दृढ़ता का भाव होने पर ही भागवत साक्षात्कार संभव हैं। साधक को सदा याद रखना चाहिए कि बिना निश्चय के नारायण नहीं मिलते। धु्रव जी ने एक निश्चय किया था कि मुझे भगवान को प्राप्त करना है। यही दृढ़ निश्चिय हमें लक्ष्य प्राप्ति में सफल बनाता हैं।महाराज श्री कहते हैं कि कलयुग में कथा का आश्रय ही सच्चा सुख प्रदान करता है। कथा श्रवण करने से दुख और पाप मिट जाते है। सभी प्रकार के सुख एवं शांति की प्राप्ति होती है। भागवत कलयुग का अमृत है और सभी दुखों की एक ही औषधि भागवत कथा है। भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को गजेन्द्र मोक्ष, वामन अवतार और समुद्र मंथन की कथा होगी। आप सपरिवार पधारकर इस कथा का आनंद अवश्य उठाएं।

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