छतरपुर। पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर का अतिरिक्त प्रभार संभालते ही वन संरक्षक नरेश सिंह यादव एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने पदभार ग्रहण करते ही बाघ संरक्षण और वन सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। बीते दिन रिजर्व में आयोजित बैठक में उन्होंने अधिकारियों के साथ रणनीति बनाई और रात में कई चेक पोस्टों पर रुककर सुरक्षा इंतज़ामों का जायजा लिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी दिनों में खजुराहो में होने वाली राष्ट्रीय कार्यशाला और बाघों की सुरक्षा को लेकर तैयारियां करना रहा। इस दौरान डिप्टी डायरेक्टर मोहित सूद, डीएफओ उत्तर पन्ना गर्वित गंगवार, डीएफओ दक्षिण पन्ना अनुपम शर्मा सहित सभी रेंज अधिकारी मौजूद रहे।
उल्लेखनीय है कि खजुराहो में 03 से 04 सितंबर तक इंटीग्रेटेड वेटलैंड मैनेजमेंट विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। यह कार्यशाला मध्यप्रदेश वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के सहयोग से की जा रही है। इसमें देशभर के विशेषज्ञ वेटलैंड संरक्षण और प्रबंधन पर विचार-विमर्श करेंगे। मध्यप्रदेश वेटलैंड नेटवर्क से समृद्ध है। प्रदेश में 500 से अधिक वेटलैंड की पहचान की गई है, जिनमें पाँच अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट्स भी शामिल हैं – भोज वेटलैंड, सिरपुर झील, यशवंत सागर, सांख्य सागर और तवा जलाशय। ये वेटलैंड जैव विविधता संरक्षण, जल सुरक्षा, बाढ़ नियंत्रण और पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
वन संरक्षक नरेश सिंह यादव ने कहा कि बाघों की सुरक्षा और वेटलैंड प्रबंधन दोनों ही आने वाले समय में बेहद अहम हैं। इस कार्यशाला के जरिए संरक्षण कार्य को और मजबूती देने के साथ-साथ भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।










