
नौगांव। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का ढोल पीटने वाला प्रशासन अब कागजों के महल खड़ा करने में माहिर हो चुका है। नौगांव के क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर इसी धांधली की एक और मिसाल बनकर सामने आया है। प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य छतरपुर, पन्ना, दमोह और सागर जिले के जनप्रतिनिधियों को शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का ज्ञान देना था लेकिन 100 से अधिक आमंत्रित जनप्रतिनिधियों में से केवल 4 ही यहां पहुंचे।सरकारी फाइलों में दुरुस्त दिखाई गई व्यवस्था की हकीकत परखने के लिए जब मीडियाकर्मी मौके पर पहुंचे तो प्रशिक्षकों के दर्शन दुर्लभ मिले। भोजन की व्यवस्था केवल कागजों में थी और जनप्रतिनिधियों के लिए आरक्षित बैठकें सूनी थीं। सरकारी सिस्टम का चमत्कार यह है कि बिना प्रशिक्षण के भी इस कार्यक्रम को सफल प्रशिक्षण घोषित कर दिया गया। फाइलों में प्रशिक्षण पूरा है, व्यय भी स्वीकृत है और इसके परिणाम भी शानदार हैं। जब इस मसले पर प्रशिक्षण केंद्र के कर्मचारी जनक सिंह से जानकारी ली गई तो उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा- हमने सभी जनप्रतिनिधियों को फोन किया था, व्यवस्था भी कर रखी थी लेकिन कोई नहीं आया तो हम क्या करें। इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी डिप्टी डायरेक्टर एसएन पटेल के पास थी, लेकिन वे भी महीने में सिर्फ फाइलों पर हस्ताक्षर करने की औपचारिकता निभाने यहां आते हैं।









