
छतरपुर। विश्व थैलीसीमिया दिवस पर डॉ श्वेता गर्ग के द्वारा ग्राम चौका में नि:शुल्क रक्त एवं स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाया गया, जिसमें एक सैकड़ा से अधिक लोगों का स्वस्थ्य परीक्षण कराया, साथ ही अपने शरीर में रक्त की मात्रा की जाँच भी कराई। शिविर में दवाओं का वितरण भी किया गया। डॉ श्वेता गर्ग ने लोगों को थैलीसीमिया बीमारी के बारे में जानकारी दी और रक्तदान के लिये प्रेरित किया। उल्लेखनीय है कि छतरपुर जिले में लगभग 30 थैलीसीमिया के मरीज पंजीकृत हैं, और उन्हें हर माह रक्त की आवश्यकता होती है।8 मई को मनाया जाता है विश्व थैलीसीमिया दिवससंपूर्ण विश्व में 8 मई को विश्व थैलीसीमिया दिवस मनाया जाता है। इसी क्रम में इस वर्ष किए जा रहे आयोजन का विषय जीवन को सशक्त बनाना, प्रगति को अपनाना, सभी के लिए न्यायसंगत और सुलभ थैलीसीमिया उपचार उपलब्ध कराना। उल्लेखनीय है कि दुनिया भर में अनुमानित 100 मिलियन लोगों में थैलीसीमिया के लिए जिम्मेदार जीन होते हैं और हर साल 30 हजार से अधिक बच्चे इस बीमारी के साथ पैदा होते हैं। अंतरराष्ट्रीय थैलीसीमिया दिवस, इस स्थिति और इसके प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाने का एक शक्तिशाली आह्वान है।क्या है थैलीसीमिया?थैलीसीमिया मेजर एक गंभीर अनुवांशिक रक्त रोग है जो हीमोग्लोबिन के उत्पादन को प्रभावित करता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन ले जाने के लिये जिम्मेदार होता है, थैलीसीमिया वाले लोगों में हीमोग्लोबिन का उत्पादन कम या असामान्य होता है, जिसके कारण थकान, पीलापन और गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है।
विश्व थैलीसीमिया दिवस का महत्व
1. थैलीसीमिया बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
2. थैलीसीमिया की रोकथाम को बढ़ावा देना।
3. थैलीसीमिया से पीडि़त लोगों और उनके परिवारों को भावनात्मक और सामाजिक समर्थन प्रदान करना।
4. थैलेसीमिया के बेहतर उपचार और इलाज के लिये अनुसंधान को प्रोत्साहित करना।
थैलेसीमिया होने के कारण…?
भारतवर्ष में 3 प्रतिशत व्यक्ति थैलेसीमिया के संवाहक हैं। संवाहक खुद रोगी न हो किंतु उसके बच्चे थैलेसीमिया से पीडि़त हो सकते हैं। यदि माता पिता दोनों ही संवाहक है तो थैलेसीमिया मेजर से ग्रस्त शिशु के जन्म होने की संभावना 25 प्रतिशत होती है। थैलीसीमिया से बचाव के लिए गर्भधारण के पूर्व रक्त परीक्षण से यह सुनिश्चित करें कि आप थैलेसीमिया संवाहक हैं अथवा नहीं। यदि माता-पता दोनों ही संवाहक हों तो गर्भस्थ शिशु की 10-12 सप्ताह में में जाँच करके थैलेसीमिया से पीडि़त शिशु का जन्म रोका जा सकता है। विशेषज्ञों द्वारा यह जाँच सुविधा व सलाह अब देश के कई जगह पर उपलब्ध है।
थैलेसीमिया के लक्षण
यह एक अनुवांशिक बीमारी है इसलिए जन्म के 6 महीने बाद ही बच्चों में ये लक्षण तेज़ी से दिखने लगते हैं, जैसे बच्चे की ग्रोथ रुक जाना, वजन ना बढऩा, कमजोरी और कुपोषण, साँस लेने में तकलीफ, थकान रहना, पेट की सूजन,जबड़े या गाल असामान्य आदि।
थैलीसीमिया का उपचार
1. थैलेसीमिया पीडि़त बच्चों का जीवन सिर्फ रक्तदान करके ही बचाया जा सकता है।
2. थैलीसीमिया बच्चों के लिए रक़्त की यह ज़रूरत केवल माता पिता द्वारा पूरी नहीं की जा सकती, इसलिए हम सबको रक्तदान करना चाहिए।









