
पुरानी तहसील परिसर में होगी विशाल धर्मसभा
छतरपुर। प्रख्यात जैन संत निर्यापक श्रवण मुनिपुंगव श्री 108 सुधा सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक रत्न 105 श्री गंभीर सागर जी महाराज का नगर में प्रथम ऐतिहासिक मंगलप्रवेश आज 14 मार्च 24 गुरुवार को सुबह ठीक साढ़े सात बजे होगा। मुनिश्री का नगर की सीमा में प्रवेश आरटीओ ऑफिस मैन रोड से होगा। मुनिश्री बस स्टैंड से चौक बाजर मार्ग के सभी जैन मंदिरों के दर्शन करते हुये पुरानी तहसील प्रांगण पहुंचेंगे। वे यहां विशाल धर्मसभा में अपने प्रेरक प्रवचन से श्रद्धालुओं को लाभान्वित करेंगे। जैन समाज के डा.सुमति प्रकाश जैन एवं समाज के उपाध्यक्ष रीतेश जैन के मुताबिक मुनिश्री का मंगल विहार कानपुर से छतरपुर की ओर विगत 18 दिनों से चल रहा है। जैन समाज छतरपुर के अध्यक्ष अरुण जैन, उपाध्यक्ष अजय फट्टा, रीतेश जैन, महामंत्री स्वदेश जैन, कोषाध्यक्ष जीतेन्द्र जैन, सह मंत्री अजित जैन सहित अनेक समाजसेवी प्रतिदिन मुनिश्री का आहार और बिहार कराने उनके पास पहुंच कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। देश के कोने कोने से भी उनके भक्त उनके दर्शन करने, आहार तथा बिहार कराने निरंतर आ रहे हैं। अभी तक नगर के सैकड़ों श्रद्धालुजन छतरपुर से एक बस सहित अनेक वाहनों में उनके आहार हेतु चौका लेकर अल सुबह उनके विहार और विश्राम स्थल की ओर प्रस्थान करते रहे हैं और फिर उनके साथ ही पद यात्रा करते हुए चलते हैं, उन्हें बहुत श्रद्धा तथा विनय भाव से आहार कराते हैं। विश्राम स्थल वाले ग्राम में उनकी प्रश्नोत्तरी सभा में भी सभी स्त्री पुरुष, युवाजन श्रद्धालु अपनी जिज्ञासा का सटीक समाधान पाते हैं। बुधवार को मुनिश्री ने ग्राम निवारी के समीप एक स्कूल में आहार एवं विश्राम किया। अपरांह में मुनिश्री सुधा सागर जी पद बिहार करते हुए महोबा चौराहे के समीप स्थित नवनिर्मित छतरपुर होटल नक्षत्र के परिसर में रुके और सायंकाल प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में श्रद्धालुओं के प्रश्नों तथा जिज्ञासा का तर्कसंगत समाधान किया/आज गुरुवार को नगर में मुनिश्री के मांगलिक प्रवेश के ऐतिहासिक पल को अपनी आँखों में कैद करने के लिये बड़ी संख्या में भक्तजन तथा कई प्रमुख व्यक्तित्व भी मुनिश्री की आत्मीय आगवानी हेतु पहुँचेंगे। मुनिश्री सुधासागर जी रोज लगभग 12 से 15 किलोमीटर पद विहार कर रहे है। जगह जगह विशाल जनसमूह मुनिश्री के दर्शन के लिये आतुर नजर आता है। मुनिश्री जनभावना को ध्यान में रखते हुये सभी को आशीर्वाद प्रदान करते हैं जहाँ भी मुनिश्री पहुंचते हैं सारा आसमान उनके जयकारों से गुंजायमान हो जाता है। मुनिश्री के पद विहार से समूचे क्षेत्र में अत्यधिक धार्मिक प्रभावना का वातावरण निर्मित हो जाता है।








